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चंपावत। उत्तराखंड की धामी सरकार की कैबिनेट बैठक रविवार को पहली बार देहरादून से बाहर आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई। राज्य के गठन के बाद यह पहली बार है कि कैबिनेट बैठक चंपावत जिले में आयोजित की गई है।

सरकार के इस कदम को सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं को शासन के स्तर तक सीधे पहुंचाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा समेत विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है। उपनल कर्मचारियों से संबंधित मामलों और पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर भी निर्णय होने की संभावना है।

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अक्टूबर महीने की पहली कैबिनेट बैठक होने के कारण सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण विषय हैं। आगामी विधानसभा सत्र को लेकर भी बैठक में फैसला होने की संभावना जताई जा रही है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार विधानसभा सत्र 26 अक्टूबर से पहले आयोजित किया जाना है, ऐसे में सत्र की तारीख और स्थान को लेकर कैबिनेट निर्णय कर सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भविष्य में कैबिनेट की बैठकों को केवल देहरादून तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी, ताकि स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय जरूरतों को शासन के स्तर पर बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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सीएम धामी ने सीमांत क्षेत्रों को राज्य और देश के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सरकार का विशेष जोर है। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में संतुलित विकास को आगे बढ़ाना है।

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बनबसा में कैबिनेट बैठक आयोजित किए जाने को महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इससे सीमांत एवं पर्वतीय क्षेत्रों के विकास को लेकर सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी और कैबिनेट बैठक से स्थानीय लोगों में उत्साह है तथा इससे सीमांत क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता मिलने का संदेश गया है।

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अब सबकी निगाहें कैबिनेट बैठक में लिए जाने वाले फैसलों पर हैं। खास तौर पर उपनल कर्मचारियों, पीजी डॉक्टरों के स्टाइपेंड, स्वास्थ्य, शिक्षा और ऊर्जा से जुड़े प्रस्तावों के अलावा आगामी विधानसभा सत्र को लेकर होने वाले निर्णयों का इंतजार किया जा रहा है।

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