खबर शेयर करें -

⚡ उत्तराखंड में बिजली चोरी अब पड़ेगी महंगी, मीटर तोड़ने पर लगेगा एक लाख तक जुर्माना

विद्युत नियामक आयोग ने लागू किया जन विश्वास अधिनियम, कारावास की जगह अब सख्त आर्थिक दंड की व्यवस्था

देहरादून। उत्तराखंड में बिजली चोरी करने वालों और यूपीसीएल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए अब राहत की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने केंद्र सरकार के जन विश्वास अधिनियम को उत्तराखंड में भी प्रभावी कर दिया है, जिसके तहत जुर्माने की रकम को कई गुना बढ़ा दिया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद प्रदेश में बिजली से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर अब पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई हो सकेगी।

मीटर तोड़ने और बिजली चोरी पर अब एक लाख तक जुर्माना

अधिनियम के मुताबिक, विद्युत आपूर्ति से जुड़ी सामग्री को लापरवाही से तोड़ने, नुकसान पहुंचाने या धारा 139 के तहत बिजली चोरी करने पर अब 5,000 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। खास बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति दोबारा भी इसी अपराध में दोषी पाया जाता है, तो उस पर भी यही जुर्माने की सीमा लागू होगी। गौरतलब है कि इससे पहले यह अधिकतम सीमा महज 10,000 रुपये तक ही सीमित थी, यानी नए प्रावधान के बाद जुर्माने की रकम में दस गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है।

यह भी पढ़ें -  (बड़ी खबर) लालकुआं-बिंदुखत्ता मुख्य मार्ग बना हादसों का सबब: बड़े-बड़े गड्ढों और जलभराव से राहगीर परेशान, कुमाऊं आयुक्त को भेजा पत्र

आयोग के आदेश न मानने पर भी भारी जुर्माना

सिर्फ बिजली चोरी ही नहीं, बल्कि आयोग की ओर से जारी किए गए आदेशों या निर्देशों की अनदेखी करने वालों पर भी अब सख्ती बढ़ा दी गई है। धारा 142 के तहत ऐसे मामलों में जुर्माने को 10,000 रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये तक कर दिया गया है। वहीं इसके अतिरिक्त अन्य छोटे-मोटे उल्लंघनों के मामलों में जुर्माने की सीमा 1,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच रखी गई है। महत्वपूर्ण यह है कि यह नई जुर्माना व्यवस्था बिजली विभाग से जुड़े सभी हितधारकों पर समान रूप से लागू होगी।

धारा 146 में बड़ा बदलाव, कारावास की जगह अब सिर्फ जुर्माना

इस अधिनियम के तहत सबसे उल्लेखनीय संशोधन धारा 146 में किया गया है। पहले जहां नियमों के उल्लंघन पर कारावास तक का प्रावधान था, वहीं अब इसे पूरी तरह हटाकर सिर्फ आर्थिक दंड को अधिक स्पष्ट रूप दिया गया है। नए नियम के अनुसार, इस धारा के तहत जुर्माना 10,000 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 10 लाख रुपये तक जा सकता है। वहीं अपेक्षाकृत छोटे उल्लंघनों के लिए जुर्माने की सीमा 1,000 रुपये से 50,000 रुपये के बीच तय की गई है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में बारिश बनी काल: तीन बच्चों समेत 11 की मौत, दो अब भी लापता; आज फिर भारी बारिश का अलर्ट

धारा 135, 138 और 140 के मामलों में समझौते की सुविधा बरकरार

अधिनियम में एक अहम प्रावधान यह भी है कि धारा 135, 138 और 140 के तहत आने वाले अपराधों के मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के लागू होने के बावजूद, उपयुक्त सरकार या इसके द्वारा अधिकृत अधिकारी निर्धारित राशि लेकर मामलों का शमन यानी समझौता कर सकेंगे। इसका मतलब है कि छोटे मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझने के बजाय तय जुर्माना अदा कर मामले का निपटारा किया जा सकेगा।


Agresar Bharat Insight

बिजली चोरी और मीटर से छेड़छाड़ जैसे मामलों में जुर्माने की रकम को दस गुना तक बढ़ाना सिर्फ एक दंडात्मक कदम भर नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं और बिजली विभाग, दोनों के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि अब इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जाएगा। जन विश्वास अधिनियम के तहत कारावास के प्रावधान को हटाकर सिर्फ आर्थिक दंड पर ज़ोर देना यह दिखाता है कि सरकार की मंशा लोगों को जेल भेजने की नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से जवाबदेह बनाकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की है — जो कि “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा सकता है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: मान्यता न लेने वाले मदरसों पर कसा शिकंजा, रुद्रपुर में लगातार दूसरा मदरसा सील

हालांकि आम उपभोक्ताओं के लिए यह ज़रूरी है कि वे इस बदलाव को गंभीरता से लें, क्योंकि अनजाने में हुई भी कोई लापरवाही अब पहले से कहीं ज़्यादा महंगी पड़ सकती है। बिजली मीटर या संबंधित उपकरणों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचना, और किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में सीधे यूपीसीएल से संपर्क करना ही अब सबसे सुरक्षित रास्ता होगा। वहीं दूसरी ओर, आयोग के लिए भी यह चुनौती होगी कि इस बढ़े हुए जुर्माने का इस्तेमाल पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो, ताकि यह व्यवस्था सुधार का ज़रिया बने, न कि उत्पीड़न का हथियार। Agresar Bharat इस नई नीति के क्रियान्वयन और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर पर आगे भी नज़र बनाए रखेगा।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad