उत्तराखंड में बारिश बनी काल: तीन बच्चों समेत 11 की मौत, दो अब भी लापता; आज फिर भारी बारिश का अलर्ट
देहरादून में रपटे में बही दो कारें, एमबीबीएस छात्रा समेत दो युवकों की जान गई; कोटद्वार में नदी पार करते बही मां-बेटी
देहरादून। सितंबर की शुरुआत के साथ उत्तराखंड में जो बारिश उम्मीद की एक फुहार बनकर आई थी, वह अब कहर बनकर टूट पड़ी है। बीते चौबीस घंटों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं — तीन मासूम बच्चों समेत कुल 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि एक महिला समेत दो लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मंगलवार को भी दून, नैनीताल और बागेश्वर में मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है, जिससे प्रशासन और आमजन, दोनों की चिंता कम होने का नाम नहीं ले रही।
देहरादून में रपटे ने ले ली दो युवा ज़िंदगियां
सोमवार देर रात देहरादून में एक ऐसा हादसा हुआ, जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। पौंधा-कंडोली मार्ग पर एक रपटा उफान पर था, जब उसी रास्ते से दो कारों में सवार होकर पांच युवा गुज़र रहे थे। अंधेरे में पानी के तेज़ बहाव का अंदाज़ा न लग पाने के कारण दोनों गाड़ियां अनियंत्रित होकर पलट गईं। सीओ सिटी स्वप्निल मुयाल के मुताबिक, इस हादसे में राजस्थान के जयपुर निवासी 21 वर्षीय अक्षय चौधरी, जो यूपीईएस बिधौली में बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र थे, और हनुमानगढ़ के पीलीबंगा निवासी 19 वर्षीय कनन सचदेवा, जो गंगानगर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं, की मौत हो गई। राहत की बात यह रही कि साथ सवार बाकी तीन युवाओं को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बचा लिया गया।
दो मासूमों की जान लील गया पानी
इस आपदा का सबसे दुखद पहलू वह है जिसमें दो बच्चों की जान गई। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. गोपी जीवी के 12 वर्षीय बेटे सम्राट का शव मंगलवार को बड़ोवाला पुल के पास आसन नदी किनारे बरामद हुआ। आशंका जताई जा रही है कि बच्चा घर के नज़दीक बरसाती नाले में बह गया होगा। वहीं गूलरघाटी रोड, बालावाला में एक 10 वर्षीय दिव्यांग बच्चा तेज़ बहाव में बह गया, और खबर लिखे जाने तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया था। प्रशासन की टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।
नयार नदी में महिला लापता, तलाश जारी
पैठाणी क्षेत्र से भी एक चिंताजनक खबर है। पश्चिमी नयार नदी में एक महिला बह गई, जिसकी पहचान ग्राम पल्ली बनास सरहद के नागधार तोक निवासी आशा देवी (33), पत्नी दलवीर सिंह के रूप में हुई है। सूचना मिलते ही पैठाणी, पाबौ और सतपुली थानों की पुलिस टीमें और एसडीआरएफ के जवान देर शाम तक तलाशी अभियान चलाते रहे, लेकिन अब तक महिला का कोई पता नहीं चल सका है।
कोटद्वार में नदी पार करते बही मां-बेटी, पिता ने बचाई जान
एक और दिल दहला देने वाली घटना कोटद्वार के सिगड्डी क्षेत्र से सामने आई। यहां कोल्हू नदी पार करते समय एक बाइक सवार परिवार हादसे का शिकार हो गया। बिजनौर के कोटकादार निवासी 35 वर्षीय सद्दाम अपनी पत्नी जेनम (23) और एक वर्षीय बेटी शहजादी उर्फ आफिया के साथ बाइक पर सवार होकर बहन की ससुराल से लौट रहे थे। तभी नदी पार करते समय बाइक अनियंत्रित हो गई और मां-बेटी तेज़ बहाव में बह गईं। पुलिस के मुताबिक, जेनम और मासूम आफिया, दोनों की मौत हो गई, जबकि सद्दाम किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहे। परिवार सिगड्डी के जंगल क्षेत्र में रहकर दूध का व्यवसाय करता था।
सात डिग्री तक गिरा पारा, आज भी भारी बारिश की चेतावनी
बारिश ने न सिर्फ जान-माल का नुकसान पहुंचाया है, बल्कि प्रदेश के तापमान में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कुमाऊं क्षेत्र के हल्द्वानी में सर्वाधिक 191.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। गढ़वाल मंडल में कालसी में 166.0 मिमी और हरिपुर में 163.6 मिमी बारिश हुई, जबकि मालदेवता में 133.0 मिमी और हाथीबड़कला में 114.0 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। इस भारी बारिश के चलते नई टिहरी में दिन का तापमान सामान्य से सात डिग्री गिरकर 20 डिग्री पर आ गया, वहीं देहरादून में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने मंगलवार को भी देहरादून, नैनीताल और बागेश्वर ज़िलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
183 से अधिक सड़कें बंद, मसूरी मार्ग पर भूस्खलन
लगातार हो रही बारिश ने राज्य के सड़क नेटवर्क को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। भूस्खलन और नदियों के उफान पर आने से प्रदेशभर में 183 से ज़्यादा प्रमुख और ग्रामीण सड़कें बंद हो चुकी हैं। मसूरी मार्ग पर ग्लोगीधार में सोमवार को हुए भूस्खलन के बाद मंगलवार सुबह पानी बैंड के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा सीधे सड़क पर आ गिरा, जिससे करीब दो मीटर सड़क भी टूट गई। प्रशासन मार्गों को बहाल करने में जुटा हुआ है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में भी बाधा बन रही है।
Agresar Bharat Insight
उत्तराखंड की पहाड़ियों से आ रही यह खबर सिर्फ एक मौसमी आपदा भर नहीं है, यह इस बात की एक कड़वी याद है कि पहाड़ी इलाकों में बारिश कितनी जल्दी जानलेवा रूप ले सकती है — खासकर तब, जब रात के अंधेरे में रपटों और नदियों के उफान का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है। इस हादसे में जान गंवाने वाले दो मासूम बच्चे, एक नवजात सी बच्ची, दो होनहार छात्र और एक लापता मां — हर एक कहानी अपने पीछे एक टूटा हुआ परिवार छोड़ जाती है, और यही वजह है कि आंकड़ों से आगे बढ़कर इन घटनाओं को इंसानी नज़रिए से भी देखा जाना ज़रूरी है।
प्रशासनिक स्तर पर 183 से अधिक सड़कों का बंद होना और लगातार जारी भूस्खलन यह दिखाता है कि राज्य का बुनियादी ढांचा अब भी अतिवृष्टि के इस स्तर को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। रपटों, पुलों और नदी किनारे बसी बस्तियों में रहने वाले परिवारों के लिए यह ज़रूरी है कि बारिश के मौसम में रात के समय अनजान रास्तों से यात्रा करने से बचें, और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली मौसम चेतावनियों को गंभीरता से लें। एसडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की तत्परता इस मुश्किल घड़ी में राहत की एक किरण ज़रूर है, लेकिन असली ज़रूरत है समय रहते ऐसी व्यवस्थाएं बनाने की, जो आने वाले मानसून सीज़न में इस तरह की जनहानि को रोक सकें। Agresar Bharat, पीड़ित परिवारों के साथ अपनी संवेदना व्यक्त करता है और आगे भी बचाव कार्यों तथा मौसम की स्थिति पर अपडेट देता रहेगा।


