⛈️ नैनीताल में बारिश का कहर जारी, गौला-कौसी नदियां उफान पर; 40 मार्गों पर थमी आवाजाही
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट में खुलासा — कोश्याकुटौली में सर्वाधिक 154 मिमी बारिश, जून से अब तक 826 मिमी से ज़्यादा वर्षा दर्ज
हल्द्वानी/नैनीताल। पहाड़ी ज़िले नैनीताल में आसमान से बरस रही बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि जिले भर में लगातार हो रही वर्षा ने न सिर्फ नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया है, बल्कि दर्जनों सड़क मार्गों को भी आवाजाही के लायक नहीं छोड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 24 घंटों में सुबह 8 बजे तक जिले में औसतन 51.59 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस बात का साफ संकेत है कि मानसून अभी भी पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। वहीं अगर मौसमी सीज़न की बात करें, तो एक जून 2026 से अब तक जिले में कुल 826.96 मिलीमीटर संचयी वर्षा हो चुकी है — यह आंकड़ा खुद बताता है कि इस बार पहाड़ों पर बादल किस कदर मेहरबान रहे हैं।
किस इलाके में कितनी बारिश, आंकड़े बता रहे पूरी तस्वीर
जिले के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की तीव्रता भी अलग-अलग रही। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार, कोश्याकुटौली क्षेत्र में सबसे ज़्यादा 154.0 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो जिले भर में सबसे अधिक रही। इसके अलावा कालाढूंगी में 102 मिमी, धारी में 62 मिमी और मुक्तेश्वर में 55.1 मिमी वर्षा हुई। वहीं हल्द्वानी में 50 मिमी, नैनीताल तहसील क्षेत्र में 43 मिमी और नैनीताल शहर में 39 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। दूसरी ओर रामनगर और बेतालघाट जैसे इलाकों में बारिश अपेक्षाकृत कम रही, जहां क्रमशः 5.8 मिमी और 5 मिमी वर्षा दर्ज हुई।
गौला-कौसी नदियां उफान पर, प्रशासन ने जारी की चेतावनी
लगातार हो रही बारिश का सीधा असर जिले की प्रमुख नदियों पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक गौला नदी का डिस्चार्ज बढ़कर 49,638 क्यूसेक तक पहुंच गया है, जबकि कौसी नदी में 24,986 क्यूसेक और नंदौर नदी में 6,110 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। नदियों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने नदी-नालों के आसपास रहने वाले निवासियों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है, ताकि किसी भी अनहोनी से पहले ही एहतियात बरता जा सके।
40 मार्ग बंद, पहाड़ी इलाकों में आवाजाही ठप
बारिश ने जिले के सड़क तंत्र पर भी गहरा असर डाला है। जिला आपदा प्रबंधन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल जिले में कुल 40 मार्ग अवरुद्ध पड़े हैं, जिससे कई क्षेत्रों का आपसी संपर्क टूट गया है। बंद मार्गों में ज्योलीकोट-मटियाली-क्वारब (फ्रॉग प्वाइंट), गाजिया-बेतालघाट-खैरना, भलानी-सिमली अमोटा, धानाचूली-खनस्यू-ओखलकांडा, रामगढ़-रानीबाग, हरिनगर-चांदपुर, भवाली-रानीखेत, पदमपुरी-बगड़, बधियाकोट-टूटा और गरमपानी-नैनीपुल जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं।
इसके अलावा काठगोदाम-हैड़ाखान मार्ग, गौलापार क्षेत्र की सड़कें, नैनीताल के आसपास के ग्रामीण मार्ग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बने कई संपर्क मार्ग भी बारिश की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इन मार्गों के बंद होने से दूरदराज़ के गांवों में रहने वाले लोगों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
Agresar Bharat Insight
नैनीताल से आ रहे यह आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि पहाड़ी ज़िलों में मानसून अब सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एक जून से अब तक 826 मिलीमीटर से ज़्यादा बारिश का आंकड़ा साफ बताता है कि इस सीज़न में नैनीताल जिले में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा हुई है, और गौला-कौसी जैसी नदियों का लगातार बढ़ता डिस्चार्ज इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में भी सतर्कता बरतने की ज़रूरत बनी रहेगी।
40 मार्गों का एक साथ बंद होना यह भी दिखाता है कि पहाड़ी क्षेत्रों की सड़क संरचना अब भी भारी बारिश के इस स्तर को झेलने में सक्षम नहीं है, खासकर पीएमजीएसवाई के तहत बने ग्रामीण संपर्क मार्ग, जो अक्सर सबसे पहले प्रभावित होते हैं और दूरदराज़ के गांवों को मुख्यधारा से काट देते हैं। ऐसे हालात में स्थानीय निवासियों के लिए यह ज़रूरी है कि वे नदी-नालों के पास जाने से बचें, अनावश्यक यात्रा टालें और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली चेतावनियों पर लगातार नज़र बनाए रखें। वहीं प्रशासन के लिए भी यह उचित समय है कि बार-बार बंद होने वाले इन मार्गों की दीर्घकालिक मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की दिशा में ठोस योजना बनाई जाए, ताकि हर मानसून में यही स्थिति दोहराई न जाए। Agresar Bharat जिले में मौसम और आपदा प्रबंधन से जुड़ी हर अहम जानकारी पर नज़र बनाए रखेगा।


