
उत्तराखंड। पहाड़ों में खेती-किसानी को नई दिशा देने वाले किसानों की कहानियां अब दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी भीम सिंह मेहरा की है, जिन्होंने सेब की बागवानी को अपनी आजीविका का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
पारंपरिक खेती के बीच बागवानी को अपनाकर भीम सिंह मेहरा ने कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं की राह दिखाई है। सेब के बागान के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया है कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों का साथ मिले तो खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच ऐसे किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सेब उत्पादन से न केवल किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं बनती हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की ओर से कृषि और बागवानी को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने और पारंपरिक खेती के साथ नई फसलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
भीम सिंह मेहरा की पहल यह दर्शाती है कि पहाड़ों में खेती को केवल परंपरागत आजीविका तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक बागवानी के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जा सकता है।



