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बनभूलपुरा हिंसा के मास्टर माइंड अब्दुल मलिक को एक मामले में जमानत तो मिल गई, लेकिन राहत नहीं मिली। 275 दिनों से नैनीताल जेल में कैद अब्दुल मलिक को अभी कितने दिन जेल में गुजारने होंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। मलिक के साथ उसका बेटा अब्दुल मोईद भी इसी जेल में कैद है। 

बनभूलपुरा के मलिक का बगीचा (कंपनी बाग) में इसी वर्ष 8 फरवरी को अतिक्रमण ढहाने गई प्रशासन और पुलिस टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया था। शाम ढलने से पहले शुरू हुए पथराव ने डूबते सूरज के साथ हिंसा का रूप ले लिया। प्राइवेट और सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। गोलियां चलाई गईं और उन्मादी भीड़ ने बनभूलपुरा थाना फूंक दिया।

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जिस सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हुआ, वो अब्दुल मलिक ने कराया और घटना के बाद से अब्दुल मलिक, उसकी पत्नी साफिया मलिक और बेटा अब्दुल मोईद शहर छोड़कर फरार हो गए। 16 दिन बाद 24 फरवरी को पुलिस ने दिल्ली से मलिक की गिरफ्तारी की। उस पर गंभीर धाराओं के साथ यूएपीए लगाया गया।

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हाई कोर्ट में अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ती रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने राजकीय भूमि को खुर्दबुर्द करने के मामले  में उसे जमानत दे दी, लेकिन दंगा फैलाने के मामले में राहत नही मिली।

9 महीने बाद भी नहीं मिला सरकारी असलहा
घटना के दिन उन्मादी भीड़ ने मलिक का बगीचा में मुखानी थाने के थानाध्यक्ष का सरकारी वाहन फूंक दिया था। तब मुखानी थानाध्यक्ष रहे प्रमोद पाठक से उनकी सरकारी रिवॉल्वर लूट गई। भीड़ ने बनभूलपुरा थाना फूंकने से पहले वहां भी लूटपाट की थी। पुलिस ने थाने से लूट गए अधिकांश कारतूस बरामद कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन 9 महीने बाद भी मुखानी थानाध्यक्ष के लूटे गए असलहे का पता नहीं चल सका।