
हॉस्टलों और PG तक स्कूटी से पहुंचाई जाती थी शराब, डिलीवरी बॉय को ₹15 हजार मासिक वेतन देने का दावा; आबकारी विभाग ने सालाना ₹5 से ₹10 करोड़ के राजस्व नुकसान की जताई आशंका
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित बिधौली में कथित अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए कॉलेजों के आसपास स्थित हॉस्टलों और पेइंग गेस्ट (PG) में रहने वाले छात्र-छात्राओं तक शराब पहुंचाई जाती थी। आबकारी विभाग की जांच में 25 वर्षीय लॉ स्टूडेंट गर्वित उर्फ विक्रांत का नाम कथित तौर पर नेटवर्क के मुख्य संचालक के रूप में सामने आया है।
बताया जा रहा है कि शराब की खरीद, ग्राहकों से ऑर्डर लेने, डिलीवरी की लोकेशन साझा करने और भुगतान का हिसाब रखने के लिए WhatsApp का इस्तेमाल किया जाता था। मामले में विभागीय कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बाद कथित सप्लाई नेटवर्क की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
हॉस्टलों तक पहुंचाई जाती थी शराब की रेट लिस्ट
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कथित नेटवर्क के जरिए दिल्ली और हरियाणा से शराब लाकर बिधौली क्षेत्र में सप्लाई की जाती थी। हॉस्टलों और PG में रहने वाले युवाओं तक ग्राहकों के रूप में पहुंच बनाने के लिए शराब की रेट लिस्ट वितरित किए जाने का भी दावा किया गया है।
ऑर्डर मिलने के बाद दोपहिया वाहनों के माध्यम से शराब की होम डिलीवरी की जाती थी। इस तरीके से ग्राहकों तक शराब पहुंचाने के लिए अलग-अलग युवाओं को जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, शराब की खरीद के स्रोत, परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी।
₹15 हजार मासिक वेतन पर रखे गए थे डिलीवरी बॉय
रिपोर्टों के अनुसार, कथित नेटवर्क में 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को डिलीवरी के काम में लगाया गया था। इन्हें लगभग ₹15 हजार प्रतिमाह वेतन दिए जाने और डिलीवरी के लिए दोपहिया वाहन उपलब्ध कराने का दावा किया गया है।
बताया गया है कि WhatsApp ग्रुप के जरिए डिलीवरी से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान होता था। कर्मचारियों को सुबह और शाम सेल्फी भेजकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ-साथ डिलीवरी की लोकेशन और भुगतान संबंधी जानकारी भी साझा करनी होती थी।
यदि जांच में इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल अवैध शराब की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे कथित तौर पर काम कर रहे संगठित वितरण तंत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
25 अगस्त को शुरू हुई कार्रवाई, कई आरोपियों पर हुई कार्रवाई
प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, 25 अगस्त 2026 की रात आबकारी विभाग ने बिधौली क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए एक कार और दो स्कूटी जब्त की थीं। इस दौरान दो आरोपियों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच आगे बढ़ने पर गर्वित उर्फ विक्रांत का नाम कथित नेटवर्क के मुख्य संचालक के रूप में सामने आया। मामले में उसके परिवार से जुड़े एक अन्य सदस्य की गिरफ्तारी की खबर भी प्रकाशित हुई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, गर्वित ने 7 अक्टूबर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आत्मसमर्पण किया। अदालत के आदेश के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इसके अगले दिन, 8 अक्टूबर को आबकारी विभाग की टीम ने बिधौली स्थित किराये के कमरे से आदित्य कुमार नामक एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया।
बताया गया है कि आदित्य के कब्जे से लगभग 10 पेटी शराब बरामद की गई। बरामद शराब की सटीक मात्रा, उसकी श्रेणी और मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका के संबंध में आधिकारिक जांच का विवरण महत्वपूर्ण होगा।
रोजाना 20 से 25 पेटी शराब की बिक्री का दावा
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू कथित तौर पर होने वाली शराब की बिक्री और उससे राज्य सरकार को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान का है।
आबकारी निरीक्षक के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस नेटवर्क के जरिए प्रतिदिन लगभग 20 से 25 पेटी शराब बेची जाती थी। विभाग ने इस गतिविधि से राज्य सरकार को सालाना करीब ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक के आबकारी राजस्व नुकसान की आशंका जताई है।
हालांकि, यह आंकड़ा एक अनुमान है। वास्तविक नुकसान का निर्धारण शराब की कुल मात्रा, खरीद और बिक्री के रिकॉर्ड, लागू कर व्यवस्था तथा जांच में सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। फिलहाल इसे प्रमाणित वित्तीय नुकसान के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
जांच के दायरे में शराब की खरीद से लेकर सप्लाई चेन तक
इस प्रकरण में कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी है। जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि शराब किन स्रोतों से खरीदी गई, उसे दूसरे राज्यों से उत्तराखंड लाने के लिए कौन-से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए और कथित बिक्री में किन लोगों की क्या भूमिका थी।
इसके अलावा, नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था, ग्राहकों तक शराब पहुंचाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था और जब्त वाहनों का इस गतिविधि में किस तरह उपयोग हुआ, इन बिंदुओं की भी पड़ताल जरूरी है।
हॉस्टलों और PG तक शराब पहुंचाए जाने के दावों के मद्देनजर सप्लाई चेन की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही, कथित नेटवर्क की वास्तविक बिक्री और संभावित राजस्व नुकसान का आकलन भी जांच का अहम हिस्सा होगा।
आबकारी निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
बिधौली क्षेत्र में सामने आए इस मामले ने अवैध शराब की आपूर्ति पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि जांच में लंबे समय तक बड़े पैमाने पर शराब की अवैध सप्लाई की पुष्टि होती है, तो यह देखना होगा कि संबंधित गतिविधियों का पता लगाने में कितना समय लगा और निगरानी तंत्र की ओर से क्या कार्रवाई की गई।
फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों, गिरफ्तारियों और बरामदगी से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण है। आरोपियों की भूमिका और कथित नेटवर्क के वास्तविक आकार को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।



