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बिंदुखत्ता / लालकुआं:

​बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। जिलास्तरीय वनाधिकार समिति द्वारा राजस्व ग्राम के दावे को स्वीकृति दिए जाने के सवा दो साल बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से अधिसूचना जारी न होने के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। 15 अगस्त से शुरू हुई घर-घर पदयात्रा के 22वें दिन शनिवार को सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।

​यह पदयात्रा शांतिनगर नब्बे फीट चौराहे से प्रारंभ होकर टूटी पुलिया बाजार, शांतिनगर गब्दा और ढाकानी रोड होते हुए प्राथमिक विद्यालय के समीप स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर पहुंची। यात्रा के रात्रि पड़ाव के दौरान भजन-कीर्तन के साथ ही वनाधिकार कानून के प्रति जन-जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

​पदयात्रा के समापन पर उपजिलाधिकारी लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को पुनः ज्ञापन भेजा गया। इस ज्ञापन के साथ विभिन्न प्रमुख जनप्रतिनिधियों के वे पत्र भी संलग्न किए गए हैं, जिनमें उन्होंने जिला स्तरीय समिति की सर्वसम्मत स्वीकृति का हवाला देते हुए राजस्व एवं मुख्य सचिव से तत्काल अधिसूचना जारी करने की सिफारिश की थी। ज्ञापन में संलग्न पत्रों में सांसद अजय भट्ट, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी, वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी सहित कई पूर्व विधायकों व मंत्रियों के पत्र शामिल हैं।

​आंदोलन के दौरान पूर्व सैनिक दीपक नेगी ने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों के स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपनी-अपनी पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बनाएं। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने बिंदुखत्ता की जनता को केवल आश्वासन दिए हैं, लेकिन अब निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है।

​आंदोलनकारियों ने आगामी 27 सितंबर को भारी संख्या में शहीद स्मारक पहुंचने और वहां से तहसील लालकुआं तक विशाल रैली निकालने का आह्वान किया है। वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट सहित क्षेत्र के तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं और सैकड़ों ग्रामीणों ने इस निर्णायक लड़ाई में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

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