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देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीतिक तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने वर्तमान विधायकों को प्रदर्शन सुधारने का अंतिम अवसर प्रदान करते हुए स्पष्ट संदेश दे दिया है। पार्टी हाईकमान ने साफ किया है कि आगामी चुनाव में प्रत्याशी चयन का एकमात्र आधार जनता के बीच उनकी सक्रियता और लोकप्रियता ही होगी। इस संबंध में नेतृत्व ने सभी विधायकों को आगामी 31 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहने, लंबित विकास परियोजनाओं को गति देने तथा शासकीय घोषणाओं को धरातल पर उतारने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

टिकट का आधार बनेगी ‘जीत की संभावना’ और सर्वे रिपोर्ट

​पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने विधायकों को मुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय मंत्रियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करने को कहा है, जिससे जनहित की योजनाओं को त्वरित गति से पूरा किया जा सके। संगठन आगामी नवंबर और दिसंबर माह में दो नए दौर के व्यापक सर्वेक्षण (सर्वे) करवाने जा रहा है। इन्हीं सर्वे से प्राप्त फीडबैक और जमीनी हकीकत के आधार पर विधानसभा टिकटों का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।

​यद्यपि पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, वर्तमान में संगठन किसी भी सिटिंग विधायक का टिकट काटने की जल्दबाजी में नहीं है, परंतु अंतिम निर्णय पूर्णतः ‘विनेबिलिटी’ (जीत की संभावना) और आम जनता से मिले प्रतिपुष्टि (फीडबैक) के आधार पर ही लिया जाएगा।

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त्रैमासिक सर्वे में मिले ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ के संकेत

​भाजपा चुनावी शंखनाद से पूर्व अब तक विभिन्न स्तरों पर तीन आंतरिक सर्वेक्षण करवा चुकी है। इन रिपोर्टों में यद्यपि संगठन की स्थिति सुदृढ़ और संतोषजनक बताई गई है, किंतु लगभग एक दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में वर्तमान विधायकों के प्रति स्थानीय स्तर पर सत्ता-विरोधी लहर (एंटी-इंकम्बेंसी) के प्रारंभिक लक्षण भी उभरे हैं। इसी कारणवश प्रादेशिक संगठन ने जनप्रतियनिधियों की क्षेत्रीय सक्रियता को अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने पर बल दिया है।

कमजोर निर्वाचन क्षेत्रों और कांग्रेस के अभेद्य गढ़ों पर विशेष रणनीति

​संगठन ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में न्यूनतम मतों के अंतर से विजित सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने की रणनीति बनाई है। विगत चुनाव में श्रीनगर, टिहरी, गदरपुर और नरेंद्रनगर जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर पार्टी अत्यंत कड़े मुकाबले में मामूली अंतर से ही जीत दर्ज कर पाई थी। इसके अतिरिक्त चकराता, भगवानपुर, पिरान कलियर और धारचूला जैसी वे सीटें हैं, जहाँ अब तक भाजपा को विजयश्री प्राप्त नहीं हो सकी है। नेतृत्व ने इन कमजोर कड़ियों और कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ों को ध्वस्त करने के लिए रणनीतिक रूप से कार्य करने की योजना बनाई है।

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विकास को गति: 25 दिनों में ₹7,300 करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां

​चुनावी मोड में आ चुकी प्रदेश सरकार भी विकास कार्यों को तीव्र गति देने में पूर्ण तत्परता से जुटी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विगत 21 अप्रैल से लेकर मात्र 25 दिनों की अल्पावधि में ₹7,300.28 करोड़ की विभिन्न जनकल्याणकारी और ढांचागत विकास योजनाओं को वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से अधिकांश परियोजनाएं बुनियादी सुविधाओं और जनसरोकारों से संबद्ध हैं।

​इसके साथ ही, सरकार का मुख्य ध्येय विगत साढ़े चार वर्षों में की गई घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना है। इस कार्यकाल में मुख्यमंत्री की कुल 4,323 घोषणाओं में से 2,444 महत्वपूर्ण घोषणाओं के शासनादेश (जीओ) निर्गत किए जा चुके हैं, जबकि शेष घोषणाओं के शासनादेश आगामी 15 जून तक अनिवार्य रूप से जारी करने के कड़े निर्देश प्रशासनिक अधिकारियों को दिए गए हैं।

प्रत्येक सीट पर विजय हमारा एकमात्र संकल्प: महेंद्र भट्ट

​भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस विषय पर संगठन का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सर्वे रिपोर्ट की समीक्षा के उपरांत सभी विधायकों को अपने क्षेत्रों में मुस्तैदी बढ़ाने के निर्देश पूर्व में ही दिए जा चुके हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा:

​”भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य 2027 के महासमर में प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक विजय दर्ज करना है। इसी उद्देश्य से संगठन स्तर पर सभी विधानसभाओं की निरंतर और सूक्ष्म मॉनिटरिंग की जा रही है। सभी विधायकों को जनसमस्याओं के त्वरित और स्थाई निवारण पर विशेष ध्यान देने के लिए निर्देशित किया गया है।”

 

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देहरादून छोड़ क्षेत्रों में डटे मंत्री और विधायक

​केंद्रीय व प्रादेशिक नेतृत्व के इस कड़े रुख के बाद उत्तराखंड के मंत्रियों और विधायकों की क्षेत्रीय सक्रियता में भारी उछाल देखा जा रहा है। कैबिनेट मंत्री अपने प्रभार वाले क्षेत्रों में लगातार बैठकें, औचक निरीक्षण और विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं, वहीं विधायक भी राजधानी देहरादून से दूरी बनाकर अपने-अपने क्षेत्रों में कैंप कर रहे हैं। स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों के सघन दौरों पर हैं, जिसका सीधा लाभ आगामी चुनावों में पार्टी संगठन और प्रत्याशियों को मिलना तय माना जा रहा है।

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