लालकुआं: बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने के संवेदनशील मुद्दे पर क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। 25 फरवरी को संपन्न हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव न आने पर विपक्षी दलों—कांग्रेस और भाकपा (माले)—के कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
कार रोड चौराहे पर प्रदर्शन और सांकेतिक विरोध
इंडिया गठबंधन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने लालकुआं के कार रोड चौराहे पर एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से राजस्व गांव के दर्जे की प्रतीक्षा कर रही है। उनका तर्क था कि पूर्व में सरकार और स्थानीय स्तर पर इस दिशा में त्वरित कार्रवाई के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन कैबिनेट बैठक में इसका उल्लेख न होने से ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति है।
तकनीकी प्रक्रिया और विपक्ष के सवाल
प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विधायक डॉ. मोहन बिष्ट के उस बयान पर भी चर्चा की, जिसमें उन्होंने दस्तावेजों की कमी को देरी का कारण बताया था। विपक्ष का कहना है कि यदि प्रक्रिया में कोई तकनीकी बाधा या कागजों की कमी थी, तो उसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए था। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि आगामी विधानसभा सत्र (जो 9 मार्च से गैरसैंण में प्रस्तावित है) में इस पर ठोस कदम उठाए जाएं।
आगामी रणनीति और चेतावनी
विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग की है कि:
- वन भूमि को राजस्व भूमि में हस्तांतरित करने का प्रस्ताव अविलंब केंद्र सरकार को भेजा जाए।
- यदि 30 अप्रैल 2026 तक इस दिशा में अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो वे व्यापक जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रमुख चेहरे
इस दौरान कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष प्रमोद चंद्र कलोनी भाकपा (माले) के जिला सचिव डॉ. कैलाश पाण्डेय, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष पुष्कर दानू, महिला कांग्रेस की मीना कपिल, गिरधर बम, कुन्दन मेहता, पुष्कर दुबड़िया सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में जनहित के इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने की अपील की है।


