बिंदुखत्ता (राजीव नगर): राजीव नगर निवासी बुद्धि वल्लभ के घर में अचानक गैस सिलेंडर में भीषण आग लग गई। हादसे में घर का सारा सामान जलकर राख हो गया। हालांकि, समय रहते घटना का पता चलने और ग्रामीणों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया और कोई जनहानि नहीं हुई।
अस्पताल गए थे माता-पिता, बच्चों को ग्रामीणों ने सुरक्षित निकाला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना के समय गृहस्वामी बुद्धि वल्लभ अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए उन्हें हल्द्वानी स्थित अस्पताल लेकर गए थे। उनकी पत्नी कल से ही अस्पताल में भर्ती हैं। घर में केवल उनके दो बच्चे अकेले थे, तभी अचानक सिलेंडर ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। बच्चों की चीख-पुकार और धुआं उठता देख आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और अपनी जान पर खेलकर दोनों मासूमों को सुरक्षित बाहर निकाला।
आपातकालीन मदद में देरी से भारी नुकसान
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने लालकुआं कोतवाली से तत्काल मदद मांगी, तो पुलिस द्वारा यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि “ITC कंपनी अग्निशमन (फायर) वाहन देने से इंकार कर रही है।” नतीजतन, अग्निशमन वाहन को हल्द्वानी से बुलाना पड़ा। हल्द्वानी से फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने में लगभग 1 घंटा लग गया, और इस 1 घंटे की देरी के कारण घर का सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गया, जिससे पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। बाद में पहुंची अग्निशमन टीम ने आग पर पूरी तरह काबू पाया और सिलेंडर फटने का बड़ा खतरा टाला।
प्रशासन और ITC प्रबंधन के बयानों में भारी विरोधाभास
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब अग्रसर भारत के संपादक पंकज शर्मा ने ITC लालकुआं के यूनिट हेड (सर्वोच्च पद) प्रणव शर्मा से सीधी बात की, तो उन्होंने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। प्रणव शर्मा ने स्पष्ट कहा कि उन्हें या उनकी यूनिट को इस प्रकार की घटना या फायर वाहन मांगने की कोई जानकारी ही नहीं दी गई थी।
दूसरी ओर, जब इस संबंध में लालकुआं कोतवाल से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए केवल इतना कहा कि “आग बुझ गई, बात खत्म” और कॉल काट दी।
एक तरफ पुलिस ITC पर मदद न देने का ठीकरा फोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ ITC प्रबंधन ऐसी किसी भी सूचना से साफ इंकार कर रहा है। कोतवाल के इस रवैये और परस्पर विरोधी बयानों से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर स्थानीय स्तर से मदद मिल जाती तो आर्थिक नुकसान होने से बच सकता था। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग की है।


