लालकुआं / बिन्दुखत्ता:
बिन्दुखत्ता को मालिकाना हक सहित राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता (एडवोकेट) प्रदीप लोहनी ने सोशल मीडिया पर एक बेहद तार्किक, विधिक और स्पष्ट संदेश साझा करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो-टूक में कहा कि बिन्दुखत्ता की जनता को उनकी भूमि पर पूर्ण स्वामित्व और विधिसम्मत मालिकाना अधिकार मिलना उनका मौलिक और दीर्घकालिक अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने जनआंदोलन की दिशा भटकाने वाले तथाकथित एकाधिकारवादी तत्वों को आड़े हाथों लेते हुए जनता से ‘मानसिक नक्सलियों’ के भ्रामक प्रचार से सावधान रहने की अपील की, और साथ ही अपनी विस्तृत और तीखी प्रतिक्रिया साझा की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिन्दुखत्ता के निवासियों को उनकी भूमि पर पूर्ण स्वामित्व और विधिसम्मत मालिकाना अधिकार मिलना जनता की वर्षों पुरानी मूल मांग है। हालांकि, उन्होंने इस जनआंदोलन की आड़ में कुछ लोगों द्वारा चलाए जा रहे एकाधिकारवादी रवैये पर कड़ा प्रहार किया है।
‘मानसिक नक्सलवाद’ और राजनीतिक भटकाव पर चिंता
प्रदीप लोहनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज कुछ तत्व अपनी ही विचारधारा को ‘अंतिम सत्य’ मानकर जनमत को एकतरफा मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे दृष्टिकोण को ‘तथाकथित मानसिक नक्सलवाद’ करार देते हुए आगाह किया कि वर्षों से संघर्ष कर रहे निष्ठावान लोग अनजाने में इस षड्यंत्र का हिस्सा न बनें।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कुछ महत्वाकांक्षी कार्यकर्ता भी बिना विषय के कानूनी व प्रशासनिक अध्ययन के ऐसे तत्वों के पीछे चलकर जनहित को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और विषय की जटिलता
बिन्दुखत्ता के इतिहास और प्रशासनिक पेचीदगियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा:
- यदि यह मुद्दा केवल नारों या सरल रास्तों से हल होने वाला होता, तो स्व. पंडित नारायण दत्त तिवारी जी जैसे दूरदर्शी नेता इसे अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में ही हल कर चुके होते।
- पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने नगरपालिका बनाने का प्रयास किया, परंतु जनता की मूल आकांक्षा केवल प्रशासनिक ढांचा नहीं बल्कि ‘जमीन का मालिकाना हक’ था, जिसके चलते व्यापक जनांदोलन हुआ।
- पूर्व विधायक नवीन दुम्का ने भी हमेशा जनता के इस भूमि स्वामित्व के अधिकार का सम्मान किया।
- यह विषय वन, भूमि, राजस्व और विधिक प्रावधानों से जुड़ा एक बेहद जटिल मामला है, जिसका समाधान केवल विधिक प्रक्रिया और प्रशासनिक समन्वय से ही संभव है।
वर्तमान नेतृत्व के प्रयासों पर विश्वास जताने का आह्वान
प्रदीप लोहनी ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को पहले से अधिक सकारात्मक बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और सांसद अजय भट्ट इस विषय पर निरंतर प्रयासरत हैं। सांसद अजय भट्ट ने लोकसभा के पटल पर भी बिन्दुखत्ता के मालिकाना हक का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है।
सामूहिक संघर्ष और एकजुटता की अपील
उन्होंने रेखांकित किया कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि पहाड़ से आकर बसे उन पूर्व सैनिकों, आपदा प्रभावितों, भूमिहीनों और मेहनतकश परिवारों के सम्मान की सामूहिक लड़ाई है जिन्होंने इस धरती को संवारा है।
उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और अंधानुकरण से ऊपर उठकर अपने जनप्रतिनिधियों का सहयोग करें, विधि सम्मत मार्ग पर विश्वास रखें और किसी भी प्रकार के भ्रामक एजेंडे से सावधान रहें।


