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नैनीताल के स्कूल में ‘भूत’ की अफवाह से मचा हड़कंप, परीक्षा छोड़कर रोते-चिल्लाते घर भागे छात्र

यूनिट टेस्ट के दौरान कुछ छात्राओं ने चक्कर और तबीयत खराब होने की शिकायत की, इसके बाद एक कक्षा से दूसरी कक्षा तक फैली ‘भूत’ की चर्चा; स्कूल प्रशासन ने परीक्षा बीच में रोककर छात्रों को भेजा घर

हल्द्वानी/नैनीताल। नैनीताल जिले के बनभूलपुरा क्षेत्र स्थित एक निजी इंटर कॉलेज में मंगलवार को यूनिट टेस्ट के दौरान अचानक ऐसा माहौल बन गया कि विद्यार्थियों में अफरा-तफरी मच गई। परीक्षा दे रहे कुछ विद्यार्थियों के बीच कथित तौर पर ‘भूत-प्रेत दिखाई देने’ की अफवाह फैल गई। देखते ही देखते डर का माहौल इतना बढ़ गया कि कई छात्र-छात्राएं रोते और चिल्लाते हुए कक्षाओं से बाहर निकल आए।

मामला बढ़ता देख स्कूल प्रशासन और शिक्षक मौके पर पहुंचे। विद्यार्थियों को समझाकर शांत कराने का प्रयास किया गया, लेकिन बच्चों में भय का माहौल देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने परीक्षा को बीच में ही रोक दिया और विद्यार्थियों की छुट्टी कर उन्हें घर भेज दिया।

पहले कुछ छात्राओं ने बताई तबीयत खराब होने की बात

जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत परीक्षा के दौरान हुई, जब कक्षा 10वीं और 11वीं की कुछ छात्राओं ने चक्कर आने और तबीयत खराब होने की शिकायत की। इसके बाद परीक्षा कक्ष में मौजूद अन्य विद्यार्थियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

इसी दौरान कुछ विद्यार्थियों ने कथित तौर पर परीक्षा कक्ष में किसी असामान्य चीज को देखने या महसूस करने की बात कही। इसके बाद ‘भूत’ या ‘भूत-प्रेत’ की चर्चा तेजी से फैलने लगी।

हालांकि, अभी तक ऐसी किसी असामान्य घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल विद्यार्थियों के बीच फैली अफवाह और भय की स्थिति के रूप में ही देखा जा रहा है।

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एक कक्षा से दूसरी कक्षा तक फैल गई अफवाह

परीक्षा के दौरान शुरू हुई चर्चा कुछ ही समय में दूसरी कक्षाओं तक पहुंच गई। अफवाह फैलने के साथ विद्यार्थियों में डर बढ़ता चला गया। कुछ छात्र घबराकर परीक्षा कक्ष से बाहर निकल गए, जबकि कुछ रोते और चिल्लाते हुए स्कूल परिसर से बाहर निकलने लगे।

स्थिति को देखते हुए शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। बच्चों को समझाने और शांत कराने की कोशिश की गई। स्कूल प्रशासन ने किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए परीक्षा रोकने का फैसला लिया।

इसके बाद विद्यार्थियों को सुरक्षित तरीके से घर भेज दिया गया।

स्कूल प्रशासन ने क्या बताया?

स्कूल प्रशासन की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, कुछ विद्यार्थियों के अस्वस्थ होने की बात सामने आई थी। इसके बाद विद्यार्थियों के बीच भय और अफवाह का माहौल बन गया।

हालांकि, स्कूल परिसर में किसी ‘भूत’ या किसी अन्य असामान्य गतिविधि की पुष्टि नहीं की गई है। प्रशासन की प्राथमिकता विद्यार्थियों को शांत करना और उन्हें सुरक्षित घर भेजना रही।

ऐसे मामलों में अफवाह तेजी से फैलने के कारण एक विद्यार्थी का डर देखते ही देखते पूरी कक्षा और फिर दूसरे कमरों तक पहुंच सकता है। इस घटना में भी कुछ ऐसा ही होने की बात सामने आ रही है।

परीक्षा बीच में रोककर कराई गई छुट्टी

विद्यार्थियों के बीच लगातार बढ़ते डर को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने परीक्षा जारी रखना उचित नहीं समझा। यूनिट टेस्ट को बीच में ही रोक दिया गया और विद्यार्थियों को घर भेज दिया गया।

स्कूल प्रबंधन के सामने उस समय सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को सुरक्षित रखना और घबराहट को नियंत्रित करना था। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को सामान्य करने की कोशिश की।

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अब विद्यार्थियों के मन से इस घटना का डर निकालना और स्कूल में दोबारा सामान्य शैक्षणिक माहौल तैयार करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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अफवाह कैसे बन जाती है सामूहिक डर की वजह?

किसी एक विद्यार्थी की तबीयत अचानक खराब होने या उसके द्वारा किसी असामान्य अनुभव की बात कहे जाने के बाद यदि आसपास मौजूद लोग उसी बात को बिना पुष्टि के आगे बढ़ाने लगें, तो कुछ ही समय में भय का माहौल बन सकता है।

स्कूलों में ऐसी परिस्थितियों में सबसे जरूरी है कि विद्यार्थी और शिक्षक अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय वास्तविक स्थिति की जानकारी लें। यदि किसी बच्चे को चक्कर, घबराहट, कमजोरी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

2022 में बागेश्वर में भी सामने आया था ऐसा मामला

उत्तराखंड में विद्यार्थियों के बीच कथित ‘भूत-बाधा’ या असामान्य गतिविधि को लेकर अफवाह का मामला पहले भी सामने आ चुका है।

वर्ष 2022 में बागेश्वर जिले के एक सरकारी स्कूल में कई छात्राओं के अचानक चिल्लाने और कुछ छात्राओं के बेहोश होने की घटना चर्चा में आई थी। उस समय भी घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग तरह की बातें सामने आई थीं और इसे कथित ‘भूत-बाधा’ से जोड़कर देखा गया था।

हालांकि, ऐसी घटनाओं में वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है, ताकि अफवाहों के कारण बच्चों में अनावश्यक भय न फैले।

बच्चों की काउंसलिंग भी जरूरी

नैनीताल के स्कूल की घटना के बाद केवल अफवाह का स्रोत पता करना ही पर्याप्त नहीं होगा। विद्यार्थियों के मन में पैदा हुए डर को दूर करना भी जरूरी है।

स्कूल प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों की काउंसलिंग, शिक्षकों के माध्यम से समझाइश और अभिभावकों से संवाद जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किसी घटना को लेकर बिना पुष्टि के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

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विशेषज्ञ दृष्टिकोण से भी देखा जाए तो परीक्षा का तनाव, अचानक तबीयत खराब होना, घबराहट और आसपास के लोगों की प्रतिक्रिया कभी-कभी सामूहिक भय की स्थिति को बढ़ा सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में शांत वातावरण बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।

अफवाह के बजाय जांच पर जोर जरूरी

इस पूरी घटना में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि किसी भूत या paranormal गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए घटना को सनसनीखेज तरीके से पेश करने के बजाय विद्यार्थियों के अस्वस्थ होने और उसके बाद फैली अफवाह के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।

यदि किसी विद्यार्थी को वास्तविक स्वास्थ्य समस्या हुई है तो उसका चिकित्सकीय परीक्षण और यदि स्कूल परिसर में किसी अन्य कारण की आशंका है तो उसकी जांच ही स्थिति को स्पष्ट कर सकती है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

घटना के बाद विद्यार्थियों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। स्कूल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और फिलहाल किसी ‘भूत’ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की गई है।

मंगलवार को परीक्षा के दौरान शुरू हुई इस घटना ने हालांकि स्कूल परिसर में कुछ समय के लिए डर और अफरा-तफरी का माहौल जरूर पैदा कर दिया। अब जरूरी है कि विद्यार्थियों और अभिभावकों तक सही जानकारी पहुंचाई जाए, अफवाहों पर रोक लगाई जाए और बच्चों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

नोट: इस खबर में ‘भूत’ से संबंधित दावे विद्यार्थियों के बीच फैली अफवाह और कथित अनुभवों पर आधारित हैं। किसी अलौकिक घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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