⚖️ दो पत्नियों के दावे में फंसी सरकारी नौकरी, बच्चों के पालन-पोषण के लिए मजदूरी को मजबूर महिला; कोर्ट में पहुंचा मामला
📍 रामनगर। उत्तराखंड के रामनगर से सरकारी नौकरी और पारिवारिक विवाद से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। वन निगम के एक कर्मचारी की मौत के बाद उसकी मृतक आश्रित नौकरी पर दो महिलाओं ने पत्नी होने का दावा किया है। दोनों के दावे के चलते करीब डेढ़ साल से नौकरी का मामला अटका हुआ है।
इतना ही नहीं, मृतक कर्मचारी से जुड़े ईपीएफ, ईएल समेत अन्य देयकों के भुगतान को लेकर भी विवाद बना हुआ है। मामला पहले परिवार न्यायालय और अब जिला अदालत तक पहुंच चुका है।
👩👧👦 चार बच्चों की जिम्मेदारी, लकड़ियां बेचकर गुजर-बसर
मामले में मृतक की एक पत्नी की आर्थिक स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। उसके अनुसार, उसके तीन बेटियां और एक बेटा हैं, जिनकी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च की जिम्मेदारी उसी पर है।
बताया गया कि आर्थिक तंगी के चलते महिला को जंगल से लकड़ियां बीनकर उन्हें बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वह कथित तौर पर रोजाना 200 से 300 रुपये तक की लकड़ियां बेचकर परिवार का खर्च चलाने का प्रयास कर रही है।
महिला ने रामनगर वन निगम के डीएसएम मुदित आर्या से मुलाकात कर मृतक आश्रित के आधार पर नौकरी दिलाने की मांग भी की है।
📂 क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, कालाढूंगी वन निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात व्यक्ति की दिसंबर 2024 में मौत हो गई थी।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, कर्मचारी की दो पत्नियां होने का दावा सामने आया है। कर्मचारी दूसरी पत्नी के साथ कालाढूंगी में रहता था और वहीं नौकरी करता था, जबकि पहली पत्नी विवाद के बाद हल्द्वानी में अलग रह रही थी।
दूसरी पत्नी से मृतक के तीन बेटियां और एक बेटा हैं, जबकि पहली पत्नी से एक बेटी होने की जानकारी सामने आई है।
⚔️ नौकरी के दावे ने बढ़ाया विवाद
पति की मौत के बाद कालाढूंगी में रहने वाली पत्नी ने मृतक आश्रित नौकरी के लिए वन निगम में अपने दस्तावेज जमा कराए। विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती, उससे पहले ही हल्द्वानी में रहने वाली दूसरी महिला भी विभागीय कार्यालय पहुंच गई और उसने भी नौकरी पर अपना दावा पेश कर दिया।
दोनों महिलाओं के दावे सामने आने के बाद विभाग के सामने यह तय करना मुश्किल हो गया कि मृतक कर्मचारी की आश्रित नौकरी किसे दी जाए।
🏛️ परिवार न्यायालय से जिला कोर्ट तक पहुंचा मामला
नौकरी को लेकर विवाद पहले परिवार न्यायालय पहुंचा। वहां से मामला स्पष्ट रूप से नहीं सुलझने के बाद दोनों पक्षों ने जिला अदालत का रुख किया।
दोनों महिलाओं ने अदालत में अपने-अपने दस्तावेज और दावे प्रस्तुत किए हैं। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।
⚖️ इसी कानूनी विवाद के कारण मृतक आश्रित नौकरी करीब डेढ़ साल से अटकी हुई बताई जा रही है।
💰 ईपीएफ और ईएल की रकम भी अटकी
विवाद केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। मृतक कर्मचारी से संबंधित ईपीएफ, ईएल और अन्य देय धनराशि के भुगतान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
परिवार के सदस्यों को इन रकमों के भुगतान का इंतजार है। विभाग का कहना है कि जब तक कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक वह नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा।
📑 एक पत्नी को कोर्ट के आदेश पर मिल रहा भरण-पोषण
वन निगम रामनगर के डीएसएम मुदित आर्या के अनुसार, कर्मचारी और हल्द्वानी निवासी महिला के बीच विवाद के बाद दोनों अलग रह रहे थे।
अधिकारी के मुताबिक, इसी दौरान कर्मचारी ने अल्मोड़ा से दूसरी शादी की और दूसरी पत्नी को कालाढूंगी ले आया। पहली पत्नी को इसकी जानकारी मिलने के बाद उसने अदालत में भरण-पोषण का मामला दायर किया था।
अदालत के आदेश के बाद निगम कर्मचारी के वेतन से निर्धारित भरण-पोषण की राशि काटकर संबंधित महिला को देता रहा।
🗣️ क्या कहते हैं वन निगम अधिकारी?
वन निगम रामनगर के डीएसएम मुदित आर्या के अनुसार, दिसंबर 2024 में कर्मचारी की मृत्यु के बाद दो महिलाओं ने खुद को उसकी पत्नी बताते हुए मृतक आश्रित नौकरी के लिए दावा किया है।
उनका कहना है कि मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। निगम अदालत के आदेश और प्राप्त कानूनी राय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करेगा।
📌 मामले की प्रमुख बातें
🔴 विभाग: वन निगम, कालाढूंगी
👤 मृतक: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
📅 मृत्यु: दिसंबर 2024
👩 दावा: दो महिलाओं ने पत्नी होने का दावा किया
👧👦 एक पत्नी से: 3 बेटियां और 1 बेटा
👧 दूसरी पत्नी से: 1 बेटी
⚖️ मामला: परिवार न्यायालय के बाद जिला अदालत में
💼 नौकरी: मृतक आश्रित के आधार पर विवादित
💰 अन्य देय: ईपीएफ, ईएल आदि
🌳 आर्थिक स्थिति: एक महिला लकड़ियां बेचकर परिवार चला रही है
📝 AgresarBharat की नजर
यह मामला केवल एक सरकारी नौकरी के विवाद तक सीमित नहीं है। इसके पीछे दो परिवारों की आर्थिक स्थिति, बच्चों की पढ़ाई और मृत कर्मचारी के बाद मिलने वाले अधिकारों का सवाल भी जुड़ा हुआ है।
फिलहाल अदालत में मामला विचाराधीन है, इसलिए यह तय करना न्यायालय का विषय होगा कि कानूनन मृतक की वैध आश्रित कौन है और मृतक आश्रित नौकरी व अन्य देयकों पर किसका अधिकार बनता है।
⚖️ अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।


