बिंदुखत्ता (उत्तराखंड):
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन के तहत 15 अगस्त से जारी पदयात्रा बुधवार को 19वें दिन भी जारी रही। मौसम विभाग के अलर्ट और मूसलाधार बारिश के बावजूद भारी संख्या में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने छाते लेकर खुरियाखत्ता से टूटीपुलिया होते हुए शीशमभुजिया तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान पदयात्रियों ने 250 से अधिक परिवारों से जनसंपर्क कर आगामी 27 सितंबर को शहीद स्मारक पर आयोजित होने वाली महारैली में शामिल होने का आह्वान किया।
शीशमभुजिया में आयोजित एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उत्तराखंड शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति ने वन अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने और बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर शासन को भेजा था। हालांकि, दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर से इसकी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अधिसूचना जारी करने के बजाय राजस्व सचिव द्वारा पत्रावली को वन अधिकार कानून के विपरीत पुनः परीक्षण के लिए वापस भेजा जा रहा है। वन अधिकार समिति द्वारा लगातार पत्राचार किए जाने के बाद भी राज्य स्तरीय निगरानी समिति (एसएलएमसी) इसका संज्ञान नहीं ले रही है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा बिंदुखत्ता के पक्ष में भेजे गए दर्जनों पत्रों पर भी राज्य शासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
सभा में स्पष्ट कहा गया, “शासन कानूनी समाधान निकालने के बजाय इस संवेदनशील मामले को जानबूझकर कानूनी पेचों में उलझा रहा है। यदि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का सम्मान किया गया होता तो यह समस्या अब तक हल हो चुकी होती।”
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।
इस अवसर पर संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलवंत बिष्ट, ममता बिष्ट, रमेश गोस्वामी, दौलत सिंह कोरंगा, बलवंत परिहार, नंदन बोरा, दीपक रौतेला, केदार सिंह कोरंगा, कुंदन सिंह कोरंगा, गोविंद गिरी, भवान सिंह कठायत, दानी कोरंगा, भास्करानंद तिवारी, हरीश रौतेला, राज्य आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखंडी, नंदन जग्गी, खीम सिंह कोरंगा, सोहन लाल, जे.सी. उप्रेती, भूपेश जोशी, दौली कोरंगा, रमा देवी, शोभा कोरंगा, हयात सिंह कोरंगा, रिया मेहता, प्रेमा मेहता, जसुली देवी, तारा देवी, चंपा कोरंगा, लीला देवी, भागीरथी देवी, बसंती कोरंगा, गीता देवी, लक्ष्मी देवी, लक्ष्मी मेहता, तुलसी देवी, आनंदी देवी और मोहनी मेहता सहित सैकड़ों क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।


