
देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच जारी विवाद पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निष्पक्ष जांच की पैरवी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आरोप लगाए जाने या कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आने से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कानून और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही किसी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
बुधवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री से रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने मामले की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपों के पीछे की परिस्थितियों को समझना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दोनों करीब 22 साल तक साथ रहे, तो इतने लंबे समय बाद आरोप सामने आने की वजह क्या है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी बातचीत में किसी व्यक्ति का नाम आने मात्र से यह साबित नहीं होता कि वह भी मामले में शामिल है। इसी तरह, सामने आई ध्वनि रिकॉर्डिंग को भी जांच के बिना अंतिम सच नहीं माना जा सकता। रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उससे जुड़े तथ्यों की पड़ताल के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचना उचित होगा।
सीएम धामी ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर किसी को दोषी ठहराने से बचने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो और यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो वह कानून से बच न सके। उन्होंने मामले में सच्चाई सामने लाने पर जोर दिया।
पत्रकार वार्ता के दौरान उर्मिला और सुरेश राठौर से जुड़ी कथित वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी सवाल पूछे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सामने आई रिकॉर्डिंग की सत्यता की जांच की जानी चाहिए और कानून के मुताबिक ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
गौरतलब है कि रेखा आर्या ने हाल ही में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने घरेलू हिंसा और मारपीट समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद गिरधारी लाल साहू ने भी एक वीडियो जारी कर रेखा आर्या पर करीब 200 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच यह मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि विवाद में किसी को भी दोषी मानने से पहले आरोपों, कथित रिकॉर्डिंग और अन्य तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच के निष्कर्ष ही आगे की कार्रवाई का आधार होने चाहिए।



