लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन अब तेज हो गया है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 से बिंदुखत्ता स्थित शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू किया गया। कांग्रेस, इंडिया गठबंधन, फ्रंटल संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल हुए।
आंदोलनकारियों के अनुसार, बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग लंबे समय से लंबित है। इससे पहले मंगलवार को हुई बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा की गई थी, जिसमें 2 अक्टूबर से क्रमिक अनशन शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
30 हजार से अधिक ग्रामीणों ने किए हस्ताक्षर
आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षेत्र के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों की ओर से प्रस्तुत सामुदायिक वन अधिकार दावे को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने 19 जून 2024 को स्वीकार किया था। इसके बावजूद राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं होने पर ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
मांग के समर्थन में चलाए गए हस्ताक्षर अभियान के दौरान 30 हजार से अधिक ग्रामीणों के हस्ताक्षर केंद्रीय जनजाति मंत्रालय और भारत सरकार को भेजे जाने की बात कही गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने की दिशा में ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
इन समस्याओं को भी आंदोलन में किया गया शामिल
राजस्व गांव के मुद्दे के साथ बिंदुखत्ता की अन्य स्थानीय समस्याओं को भी आंदोलन में शामिल किया गया है। इनमें—
- गौला नदी में स्थायी तटबंध का निर्माण
- सेंचुरी पेपर मिल से निकलने वाले प्रदूषित नालों को भूमिगत करना
- घोड़ानाला क्षेत्र में नलकूप और ओवरहेड टैंक की स्थापना
- पेपर मिल में स्थानीय लोगों को रोजगार
- शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के नाम से स्वीकृत मिनी खेल स्टेडियम का निर्माण शुरू कराना
- बिंदुखत्ता में गन्ना कोऑपरेटिव सोसायटियों का गठन
जैसी मांगें शामिल हैं।
11 सदस्यीय कोर कमेटी गठित
आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 11 सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी क्रमिक अनशन की व्यवस्थाओं के साथ आंदोलन के आगामी कार्यक्रम और रणनीति तय करेगी।
क्रमिक अनशन के दौरान भारतीय किसान महासभा बिंदुखत्ता की अध्यक्ष विमला पाल, मुख्य संयोजक सूबेदार मेजर कुंदन सिंह मेहता, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिंदुखत्ता अध्यक्ष प्रदीप बथ्याल, राजेंद्र दुर्गापाल, हरेंद्र बोरा, नंदन दुर्गापाल, बिना जोशी, मीना रावत, राजेंद्र खानवाल, राकेश कुमार, प्रकाश कापड़ी, हरिश बिष्ट, भगवान सिंह धामी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि राजस्व गांव की अधिसूचना जारी होने तक आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जाएगा।


