
5 साल से प्रदेश में रह रहे परिवार भी करा सकेंगे पंजीकरण, सबसे वरिष्ठ महिला बनेगी परिवार की मुखिया; डेटा से छेड़छाड़ पर 10 साल की जेल और 50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान
देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को ‘देवभूमि परिवार पोर्टल’ का शुभारंभ कर दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के परिवारों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान यानी देवभूमि परिवार आईडी दी जाएगी। इसके जरिए परिवार के सभी सदस्यों का रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाना और वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। खास बात यह है कि इस व्यवस्था का लाभ केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पिछले 15 वर्षों से प्रदेश में रह रहे परिवार भी निर्धारित शर्तों के तहत पंजीकरण करा सकेंगे।
क्या है देवभूमि परिवार आईडी?
देवभूमि परिवार आईडी एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या होगी, जिसके माध्यम से परिवार के सभी सदस्यों का एकीकृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें सदस्यों के नाम, आयु, आधार से संबंधित जानकारी, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसी जानकारियां शामिल होंगी।
इस व्यवस्था से सरकारी विभागों को परिवार की पात्रता और विभिन्न योजनाओं के तहत मिल रहे लाभों की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। इससे नागरिकों को बार-बार अलग-अलग विभागों में दस्तावेज जमा कराने की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
15 साल से उत्तराखंड में रह रहे परिवार भी होंगे शामिल
देवभूमि परिवार आईडी की सबसे अहम विशेषता इसकी पात्रता से जुड़ी है। इसके तहत उत्तराखंड के मूल निवासियों के साथ ऐसे परिवार भी पंजीकरण करा सकेंगे, जो पिछले 15 वर्षों से लगातार प्रदेश में निवास कर रहे हैं।
इससे लंबे समय से राज्य में रह रहे परिवारों का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा। हालांकि, पंजीकरण के लिए निर्धारित दस्तावेजों और सत्यापन प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला बनेगी मुखिया
इस नई व्यवस्था में महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला को परिवार का मुखिया बनाया जाएगा। परिवार की डिजिटल पहचान इसी महिला मुखिया के नाम से जुड़ेगी।
इसे परिवार की पहचान व्यवस्था में महिलाओं को प्राथमिकता देने वाला महत्वपूर्ण प्रावधान माना जा रहा है।
फर्जी लाभार्थियों पर लगेगी लगाम, योजनाओं का होगा सत्यापन
अभी अलग-अलग सरकारी विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस तैयार करते हैं। ऐसे में कई बार एक ही व्यक्ति का विवरण अलग-अलग विभागों में दर्ज होने, दोहरे लाभ और पात्रता के सत्यापन में देरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
देवभूमि परिवार आईडी लागू होने से परिवारों का एकीकृत डेटाबेस तैयार होगा। इससे सरकार यह पता लगा सकेगी कि किस परिवार को किन योजनाओं का लाभ मिल रहा है और वह किन अन्य योजनाओं के लिए पात्र है। इससे अपात्र लाभार्थियों की पहचान और सरकारी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलने की उम्मीद है।
डेटा चोरी करने वालों पर 10 साल की जेल और 50 लाख जुर्माना
इस डिजिटल व्यवस्था में परिवारों की व्यक्तिगत और सामाजिक-आर्थिक जानकारियां दर्ज की जाएंगी। ऐसे में डेटा की सुरक्षा को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
अधिनियम के अनुसार, डेटाबेस में अनधिकृत तरीके से सेंधमारी करने या अवैध रूप से डेटा तक पहुंच बनाने के दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
विधानसभा से पारित होकर लागू हुआ देवभूमि परिवार अधिनियम 2026
देवभूमि परिवार आईडी को कानूनी आधार देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर देवभूमि परिवार अधिनियम 2026 विधानसभा में पेश किया गया था। विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिली और इसके बाद यह अधिनियम लागू हुआ।
अब मुख्यमंत्री द्वारा पोर्टल का शुभारंभ किए जाने के साथ ही इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
आम जनता को क्या होंगे बड़े फायदे?
देवभूमि परिवार आईडी लागू होने से प्रदेश के नागरिकों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
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परिवार के सभी सदस्यों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
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सरकारी योजनाओं के लिए पात्रता का सत्यापन आसान होगा।
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बार-बार दस्तावेज जमा कराने की जरूरत कम हो सकती है।
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दोहरे और फर्जी लाभार्थियों की पहचान में मदद मिलेगी।
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सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने में पारदर्शिता बढ़ेगी।
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अलग-अलग विभागों के बीच जानकारी साझा करना आसान होगा।
कुल मिलाकर, देवभूमि परिवार आईडी उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं के वितरण और प्रशासनिक व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पंजीकरण प्रक्रिया कितनी आसान रहती है और आम नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाती है।



