
नई दिल्ली। पड़ोसी देश भूटान में ग्लेशियर झील फटने (GLOF) की घटना के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भूटान की शिंटाफू झील में गुरुवार शाम हुए जल विस्फोट के बाद भारत सरकार ने पश्चिम बंगाल और असम के कई जिलों के लिए विशेष बाढ़ चेतावनी जारी की है। अधिकारियों को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटना के बाद विशेष रूप से संकोश नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत दलों को अलर्ट पर रखा है।
भूटान की शिंटाफू झील में हुआ जल विस्फोट
जानकारी के अनुसार, यह घटना भूटान के गासा जिले के लाया गेवोग क्षेत्र में वाकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंटाफू झील में हुई। गुरुवार शाम झील से अचानक पानी का बहाव बढ़ने की सूचना मिली। इसके बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क करने के लिए सायरन बजाए गए और प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
शिंटाफू झील भूटान की उन 17 हिमनद झीलों में शामिल है, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना जाता है। भूटान के राष्ट्रीय जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान केंद्र (NCHM) के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जलस्तर की निगरानी के लिए तक्त्सिमाखांग में स्टेशन स्थापित है, हालांकि घटना के शुरुआती समय में वहां कोई अलर्ट सक्रिय नहीं हुआ था।
क्या होता है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसमें ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झील में जमा पानी अचानक बाहर निकल जाता है। आमतौर पर झील को रोकने वाली प्राकृतिक बर्फ या मिट्टी की दीवार टूटने अथवा कमजोर होने से ऐसा होता है।
पानी का तेज बहाव पहाड़ी घाटियों से गुजरते हुए अपने साथ मलबा, पत्थर और मिट्टी भी बहाकर ले जा सकता है। इससे निचले इलाकों में बस्तियों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
असम और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में अलर्ट
भारत सरकार की ओर से जारी विशेष सलाह के बाद पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क किया गया है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। वहीं असम के धुबरी जिले में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
प्रशासन को आशंका है कि भूटान के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में पानी का अचानक बहाव बढ़ने से संकोश नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर जा सकता है। शुरुआती आकलन के अनुसार, पानी को भारत-भूटान सीमा तक पहुंचने में लगभग छह से आठ घंटे लग सकते हैं।
NDRF और SDRF की टीमें तैनात
संभावित खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के तूफानगंज और बॉक्सिरहाट क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं। ये इलाके असम सीमा के पास संकोश नदी के किनारे स्थित हैं।
प्रशासन की ओर से नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। दोनों राज्यों के अधिकारी जलस्तर और पानी के बहाव की स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहे हैं।
मंत्री ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की
पश्चिम बंगाल के वन मंत्री एवं कुमारग्राम के विधायक मनोज कुमार ओरांव ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों से तत्काल सतर्कता बरतने की अपील की है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में चेतावनी दी कि पानी का तेज बहाव अगले एक से डेढ़ घंटे में कुमारग्राम क्षेत्र की नदी तक पहुंच सकता है। उन्होंने लोगों से एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन का सहयोग करने का आग्रह किया।
वहीं दार्जिलिंग से भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सार्वजनिक सुरक्षा अलर्ट जारी किया। उन्होंने संकोश नदी और उससे जुड़ी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी से सुरक्षित दूरी बनाने और अपनी जान की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
प्रशासन की नजर हालात पर, लोगों से सतर्क रहने की अपील
भूटान में हुई इस घटना के बाद भारत के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। फिलहाल झील से निकले पानी की वास्तविक मात्रा और निचले क्षेत्रों पर इसके संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नदी के जलस्तर में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से निपटना और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने और किसी भी तरह की लापरवाही से बचने की सलाह दी गई है।



