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बिंदुखत्ता (लालकुआं)। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या आम जनमानस की जान की कीमत अधिकारियों की फाइलों और सफेदपोशों की राजनीति के सामने शून्य हो गई है? ये सवाल आज बिंदुखत्ता की जनता पूछ रही है, जहाँ कार रोड पर दौड़ते कंडम ट्रक सीधे तौर पर ‘यमराज’ को चुनौती दे रहे हैं।

आज शाम की लाइव तस्वीरें: आंखों के सामने मौत का तांडव

अग्रसर भारत के पास मौजूद यह वीडियो आज 7 मई 2026 की शाम ठीक 6:25 बजे की है। यह कोई पुरानी घटना नहीं, बल्कि अभी और इसी वक्त की हकीकत है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे नियमों को ठेंगा दिखाते हुए यह वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहा है। अब सवाल यह है कि आखिर प्रशासन अपनी आंखें कब खोलेगा? और कब इन जानलेवा वाहनों पर लगाम लगेगी?

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कबाड़ गाड़ी, पर हौसले बुलंद: आखिर कौन है जिम्मेदार?

​ सामने आए वीडियो और तस्वीरों ने परिवहन विभाग और आरटीओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क पर दौड़ रहे इस ट्रक की हालत इतनी खस्ता है कि उसे ‘कबाड़’ कहना भी कम होगा।

  • झुका हुआ ढांचा: ट्रक एक तरफ पूरी तरह झुका हुआ है, जो किसी भी वक्त संतुलन खोकर पलट सकता है
  • खतरनाक डाला: ट्रक का पिछला दरवाजा (डाला) इस कदर खराब है कि वह कभी भी खुल सकता है, जिससे पीछे चल रहे दुपहिया वाहन या पैदल यात्री उसकी चपेट में आ सकते हैं।
  • गायब नंबर प्लेट: हैरानी की बात यह है कि गाड़ी का नंबर तक स्पष्ट नहीं दिख रहा है। यह सीधे तौर पर नियमों की धज्जी उड़ाने जैसा है।
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फिटनेस देने वाले अधिकारी भी कटघरे में

​जनता का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस ‘खटारा’ गाड़ी को फिटनेस सर्टिफिकेट किसने और कैसे दिया? अगर प्रशासन की नजरों में यह गाड़ी सड़क पर चलने लायक है, तो उस अधिकारी की योग्यता और ईमानदारी की जांच होनी चाहिए जिसने इसे पास किया। क्या चंद रुपयों के लालच में मासूमों की जान को खतरे में डालना जायज है?

5 साल का ‘शून्य’ नेतृत्व और जनता का दर्द

​पिछले 5 वर्षों में क्षेत्र की स्थिति बद से बदतर हुई है। राजनीतिक स्तर इतना गिर चुका है कि आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं और सुरक्षा पर कोई संज्ञान लेने वाला नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर धूल, अंधेरा और ऊपर से इन बेलगाम वाहनों का आतंक—आखिर कैसा नेतृत्व है यह, जो अपनों की ही सुरक्षा नहीं कर पा रहा?

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प्रशासन से सीधी मांग: त्वरित कार्रवाई हो

​यदि समय रहते इन वाहनों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो होने वाली किसी भी अनहोनी का जिम्मेदार केवल गाड़ी मालिक नहीं, बल्कि वह शासन-प्रशासन होगा जो इसे देखकर भी आंखें मूंदे बैठा है।

हमारी मांग है:

  1. ​बिना फिटनेस और कंडम हालत में चल रहे वाहन  को तुरंत सीज किया जाए।
  2. ​गलत तरीके से फिटनेस देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  3. ​जनता की सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखकर सड़कों पर चेकिंग अभियान चलाया जाए।

अग्रसर भारत न्यूज़ प्रशासन से सवाल पूछता है—क्या आप किसी लाश के गिरने का इंतजार कर रहे हैं या आज ही सख्त एक्शन लेंगे?

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