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लालकुआं (अग्रसर भारत ब्यूरो):

क्षेत्र के विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाएं और बजट स्वीकृत किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर काम शुरू होने से पहले ही शिलालेख लगाने और श्रेय लेने की जल्दबाजी कई बार कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर देती है। ऐसा ही एक ताजा मामला लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के डूंगरपुर से सामने आया है, जहां सड़क निर्माण का कार्य शुरू होने से पहले ही शुभारंभ का शिलापट स्थापित कर दिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति यह निकली कि संबंधित कार्य का टेंडर ही निरस्त हो चुका है।

धरातल पर काम शून्य, सिर्फ लग गया पत्थर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग द्वारा राज्य योजना के तहत लालकुआं क्षेत्र में डूंगरपुर निवासी कमल दुम्का के घर तक 0.250 किमी सीसी मार्ग नवनिर्माण (स्वीकृत लागत ₹17.00 लाख) के लिए 22 जून 2026 की तिथि का शुभारंभ शिलापट लगाया गया। इस शिलापट पर स्थानीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज किए गए।

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सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद खुली पोल

स्थानीय नागरिक कमल दुम्का ने जब लंबे समय तक कार्य प्रारंभ न होने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कराई, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जानकारी के अनुसार, संबंधित ठेकेदार द्वारा कार्य करने में असमर्थता जताए जाने के कारण उक्त टेंडर निरस्त हो चुका है।

आखिर श्रेय लेने की इतनी जल्दबाजी क्यों?

इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक तालमेल और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर आत्ममंथन योग्य सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • ​जब धरातल पर निर्माण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से सुनिश्चित ही नहीं हुई थी, तो शिलालेख लगाने की इतनी जल्दी क्यों दिखाई गई?
  • ​क्या विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति से अधिक प्राथमिकता शिलापटों के जरिए श्रेय लेने को दी जा रही है?
  • ​संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय का अभाव क्यों है कि निरस्त हो चुके टेंडर का भी भव्य शुभारंभ दर्ज हो जाता है?
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​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार की मंशा क्षेत्र के विकास की है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को केवल पत्थरों और फोटो तक सीमित रहने के बजाय कार्यों की धरातलीय स्थिति और निगरानी पर अधिक ध्यान देना चाहिए, ताकि जनता के बीच उनकी विश्वसनीयता बनी रहे।

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अग्रसर भारत’ से बोले कमल दुम्का— ‘काम नहीं हुआ तो जाएंगे कोर्ट’
इस पूरे मामले को लेकर जब अग्रसर भारत की टीम ने प्रभावित पक्ष कमल दुम्का से सीधी बातचीत की, तो उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए पूरा घटनाक्रम साझा किया। उन्होंने बताया:
​”बिना मेरी जानकारी के मेरे घर तक जाने वाले मार्ग पर शुभारंभ का पत्थर लगा दिया गया। जब महीनों तक काम शुरू नहीं हुआ और मैंने सीएम हेल्पलाइन पर जानकारी ली, तब पता चला कि टेंडर ही निरस्त है। यह केवल श्रेय लेने का प्रयास है। यदि शासन-प्रशासन ने इस मार्ग का निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा नहीं कराया, तो मैं न्याय के लिए न्यायालय (कोर्ट) की शरण में जाऊंगा।”

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