लालकुआं (बिंदुखत्ता)।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा दायित्व जनता की बुनियादी समस्याओं का निराकरण करना होता है। लेकिन जब सत्ता पक्ष के ही समर्पित कार्यकर्ता और पदाधिकारी अपने क्षेत्र की बदहाली पर आवाज उठाने लगें, तो यह साफ संकेत है कि विकास के दावे धरातल से कोसों दूर हैं। ऐसा ही एक गंभीर मामला लालकुआं विधानसभा के बिंदुखत्ता क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ पूर्व भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष चंद्रकांता गड़िया ने स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
”यह मेरा निजी रास्ता नहीं, पूरी जनता का मार्ग है”
एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बात रखते हुए चंद्रकांता गड़िया ने बिंदुखत्ता के आंतरिक रास्तों की दयनीय स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि जिस मुख्य मार्ग (शॉर्टकट और मेन रास्ता) से होकर रोजाना बुजुर्ग, स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चे और स्थानीय महिलाएं गुजरती हैं, वह पूरी तरह से बदहाल हो चुका है। सड़कों पर पड़े गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, स्कूली बच्चे गिरकर चोटिल हो रहे हैं और लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
”जब हमारा रास्ता ही नहीं बना, तो बिजली के पोल और अन्य सुविधाएं कहाँ से लगेंगी? जमीनी स्तर पर विकास पूरी तरह ठप है।” – चंद्रकांता गड़िया, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष
ढाई साल बनाम तीन साल की बहस: जनहित पर भारी पड़ती ‘अहंकार’ की राजनीति
चंद्रकांता जी ने जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को उजागर करते हुए बताया कि जब वह इस सार्वजनिक रास्ते के निर्माण की गुहार लेकर वर्तमान विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के पास गईं, तो उन्हें विकास का ठोस आश्वासन मिलने के बजाय एक अजीब सी दलील सुनने को मिली।
विधायक जी का ध्यान इस बात पर कम था कि जनता किस हाल में जी रही है, बल्कि वह इस बात पर उलझ गए कि उनके कार्यकाल को अभी तीन साल नहीं बल्कि ढाई साल ही हुए हैं। एक जागरूक जनसेवक के लिए क्या महीनों और सालों की गिनती बुनियादी समस्याओं से बड़ी हो सकती है? जब कार्यकाल के पाँच वर्ष पूरे होने को आ रहे हैं, तब भी जमीनी हालात जस के तस बने हुए हैं।
जब अपनों की ही नहीं सुनी गई, तो आम जनमानस का क्या होगा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि चंद्रकांता गड़िया कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि खुद सत्ताधारी दल की पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने विधायक के बनते ही इस समस्या के लिए लिखित आवेदन दिया था।
यदि पार्टी के शीर्ष पदों पर रहने वाली एक महिला नेत्री को अपने क्षेत्र के एक छोटे से रास्ते को बनवाने के लिए वर्षों तक भटकना पड़ रहा है और जनप्रतिनिधि की बेरुखी झेलनी पड़ रही है, तो बिंदुखत्ता और लालकुआं की आम जनता, गरीब ग्रामीणों और असहाय महिलाओं की सुनवाई किस स्तर पर होती होगी? यह स्थिति सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधित्व की विफलता को दर्शाती है।
सरकार और प्रशासन से मांग: बड़े दावों के बीच ‘जमीनी विकास’ को न भूलें
लालकुआं विधानसभा के व्यापक हित और आम जनमानस की भलाई के लिए यह बेहद जरूरी है कि सरकार केवल बड़े-बड़े विकास कार्यों का ढिंढोरा न पीटे। जब तक ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर सड़कें, बिजली के पोल और बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक किसी भी विकास को सार्थक नहीं माना जा सकता।
अग्रसर भारत की अपील:
लालकुआं विधानसभा की जनता अब केवल खोखले आश्वासनों और कागजी वादों से थक चुकी है। आने वाले समय में जनता उसी को अपना प्रतिनिधि चुनेगी जो उनकी जमीनी समस्याओं को समझेगा और उनका स्थायी समाधान करेगा। प्रशासन और स्थानीय विधायक को तुरंत संज्ञान लेते हुए बिंदुखत्ता के इस बदहाल रास्ते का निर्माण कार्य शुरू कराना चाहिए ताकि बुजुर्गों और बच्चों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।
रिपोर्ट: अग्रसर भारत ब्यूरो


