
उत्तराखंड। पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ सुहागिन महिलाओं ने करवाचौथ का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद महिलाओं ने शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और चंद्रमा के दर्शन कर व्रत का पारण किया।
करवाचौथ के अवसर पर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों, सोलह श्रृंगार और हाथों में सजी मेहंदी के साथ महिलाओं ने पर्व की खुशियां साझा कीं। घरों में पूजा की तैयारियां की गईं और महिलाओं ने एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनी।
रात्रि में चंद्रमा के उदय होने का इंतजार किया गया। चांद दिखाई देने के बाद महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखकर पूजा संपन्न की। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला गया।
करवाचौथ केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रेम, विश्वास और आपसी समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। समय के साथ इस पर्व के स्वरूप में बदलाव आया है, लेकिन इसके प्रति महिलाओं की आस्था और उत्साह आज भी बरकरार है।



