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हल्द्वानी | अग्रसर भारत डेस्क 📍

हल्द्वानी का बहुचर्चित बनभूलपुरा अतिक्रमण मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है। रेलवे की करीब 29 एकड़ भूमि पर बसे 4,365 घरों के भविष्य को लेकर 24 फरवरी 2026 को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। सुनवाई की तारीख नजदीक आते ही क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है और प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर आ गया है। 🏛️ सतर्कता

📍 क्या है पूरा मामला? 🧐

​हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र की 29 एकड़ रेलवे भूमि पर अतिक्रमण को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही है।

  • दावा: रेलवे का दावा है कि उसकी भूमि पर अवैध कब्जा है, जिसके तहत 4,365 नोटिस जारी किए गए थे। 📄
  • आबादी: इस क्षेत्र में लगभग 50,000 की आबादी निवास करती है, जिसमें स्कूल, मंदिर, मस्जिद और सरकारी अस्पताल भी शामिल हैं। 🏘️
  • वर्तमान स्थिति: नैनीताल हाईकोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले एक साल से रोक (Stay) लगा रखी है। अब 24 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं कि क्या कोर्ट स्टे बढ़ाएगा या कोई अंतिम फैसला आएगा। ⚖️✨
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👮 पुलिस अलर्ट और पीस कमेटी की बैठक

​संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम शुरू कर दिए हैं। 🚩

  • शांति की अपील: बनभूलपुरा थाने में आयोजित पीस कमेटी की बैठक में पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय प्रबुद्धजनों के साथ वार्ता की। 🤝
  • सौहार्द का संदेश: आगामी पवित्र महीने रमजान और कोर्ट की सुनवाई के मद्देनजर पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। 🌙✨
  • मुस्तैदी: विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। 🕵️‍♂️📸
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🤔 चर्चाओं का बाजार गर्म

​जैसे-जैसे 24 फरवरी का दिन नजदीक आ रहा है, गफूर बस्ती सहित पूरे बनभूलपुरा में बेचैनी और चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए राहत प्रदान करेगा। वहीं, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। 🏛️🚫

संपादकीय टिप्पणी: बनभूलपुरा का मुद्दा केवल कानूनी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की छत से जुड़ा है। ‘अग्रसर भारत’ अपील करता है कि न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखें और शांति बनाए रखें। 🚩🙌

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