लालकुआं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच लालकुआं से भाजपा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने आगामी विधानसभा टिकट को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी नेतृत्व पर पूरा भरोसा है और भाजपा नेतृत्व जो भी निर्णय करेगा, वह उन्हें स्वीकार होगा। उन्होंने टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय चुनाव लड़ने की संभावना से भी इनकार किया है।
डॉ. बिष्ट ने कहा कि भाजपा संगठन में प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी दावेदारी रखने का अधिकार है और किसी अन्य नेता के चुनाव लड़ने की इच्छा को वह व्यक्तिगत चुनौती के रूप में नहीं देखते। उनके अनुसार, प्रत्याशी चयन का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है।
“पार्टी जो निर्णय करेगी, वह स्वीकार होगा”
लालकुआं सीट पर 2027 के लिए भाजपा के भीतर संभावित दावेदारों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच डॉ. बिष्ट ने कहा कि वह पार्टी के निर्णय पर भरोसा रखते हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे पार्टी नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। भाजपा जो निर्णय करेगी, वह स्वीकार होगा। निर्दलीय चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं उठता।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी उन्हें प्रत्याशी बनाती है तो वह संगठन के निर्देशों के अनुसार चुनाव लड़ेंगे और यदि किसी अन्य कार्यकर्ता को टिकट मिलता है, तब भी वह भाजपा संगठन के साथ ही रहेंगे।
2022 में हरीश रावत को हराकर पहली बार बने विधायक
डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने 2022 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में लालकुआं सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को पराजित किया था।
चुनाव परिणामों के अनुसार बिष्ट को 46,307 वोट मिले थे, जबकि हरीश रावत को 28,780 वोट मिले। जीत का अंतर 17,527 वोट रहा।
विधायक बनने से पहले बिष्ट जिला पंचायत सदस्य के रूप में भी सक्रिय रहे थे। 2022 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने जिला पंचायत सदस्य पद से इस्तीफा दिया था।
टिकट की दावेदारी को लेकर बोले— यह संगठन की सामान्य प्रक्रिया
लालकुआं विधानसभा सीट पर भाजपा के अन्य नेताओं की संभावित दावेदारी के सवाल पर डॉ. बिष्ट ने कहा कि पार्टी एक कार्यकर्ता आधारित संगठन है और हर कार्यकर्ता को अपनी बात पार्टी के सामने रखने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि किसी नेता द्वारा टिकट की दावेदारी करना असामान्य नहीं है और वह इसे व्यक्तिगत चुनौती के तौर पर नहीं देखते।
“अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है। हम सभी भाजपा के कार्यकर्ता हैं और पार्टी नेतृत्व जो निर्णय करेगा, उसका सम्मान करना प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व है।”
आंतरिक सर्वे की रिपोर्ट की जानकारी से किया इनकार
भाजपा के संभावित आंतरिक सर्वे और मौजूदा विधायकों के टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं के बारे में पूछे जाने पर डॉ. बिष्ट ने कहा कि उन्हें अपने संबंध में किसी आंतरिक सर्वे के फीडबैक की जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह ऐसी चर्चाओं के बजाय अपने कार्यों और जनता के बीच किए गए प्रयासों पर भरोसा करते हैं।
डॉ. बिष्ट के मुताबिक, संगठन ने उन्हें जो जिम्मेदारियां दीं, उन्हें उन्होंने निभाने का प्रयास किया है और विधायक के रूप में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठाना उनकी प्राथमिकताओं में रहा है।
“जनता का विश्वास मेरी सबसे बड़ी ताकत”
अपने विधायक कार्यकाल की उपलब्धियों के सवाल पर डॉ. बिष्ट ने किसी एक काम को सबसे बड़ी उपलब्धि बताने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए जनता की समस्याओं को सुनना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी ताकत उसका पद नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है।
उनके अनुसार, क्षेत्र में अभी भी कई समस्याओं पर काम किया जाना बाकी है और उनका प्रयास रहेगा कि इन मुद्दों को संबंधित विभागों और सरकार के सामने लगातार उठाया जाता रहे।
जिला पंचायत से विधानसभा तक जनता के बीच सक्रियता का दावा
डॉ. बिष्ट ने अपने राजनीतिक सफर में जिला पंचायत सदस्य के कार्यकाल को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार लोगों के बीच रहने और स्थानीय समस्याओं को समझने का अवसर मिला।
उनका कहना है कि विधायक बनने के बाद भी उन्होंने जनता से संपर्क बनाए रखने का प्रयास किया और क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को संबंधित स्तर तक पहुंचाने को प्राथमिकता दी।
टिकट नहीं मिला तो क्या करेंगे?
साक्षात्कार में सबसे महत्वपूर्ण सवाल तब आया जब उनसे पूछा गया कि यदि भाजपा 2027 में उन्हें टिकट नहीं देती है तो क्या वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
इस पर डॉ. बिष्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि निर्दलीय चुनाव लड़ने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन्हें अलग-अलग स्तरों पर काम करने का अवसर दिया है और संगठन उनके राजनीतिक जीवन का आधार रहा है।
उनके मुताबिक, पार्टी यदि किसी अन्य कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाती है तो भी वह संगठन के साथ रहेंगे।
“मेरे लिए भाजपा केवल चुनाव का टिकट नहीं है। यह संगठन, विचार और कार्यकर्ताओं का परिवार है। इसलिए पार्टी के निर्णय के विरुद्ध जाने का सवाल ही नहीं उठता।”
जनता के नाम संदेश
लालकुआं की जनता के लिए अपने संदेश में डॉ. बिष्ट ने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने उन्हें जिला पंचायत सदस्य से लेकर विधायक तक सेवा करने का अवसर दिया है और वह इसके लिए आभारी हैं।
उन्होंने कहा कि आगे भी वह क्षेत्र के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए काम करते रहेंगे।
लालकुआं की राजनीति में बयान के मायने
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले लालकुआं सीट पर भाजपा के भीतर टिकट को लेकर चर्चाएं जारी हैं। ऐसे समय में मौजूदा विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट का बयान मुख्य रूप से तीन बातों को सामने रखता है।
पहला, उन्होंने टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ा है।
दूसरा, उन्होंने अपने विधायक कार्यकाल और जनता के बीच सक्रियता को अपनी राजनीतिक स्थिति का आधार बताया है।
तीसरा, उन्होंने टिकट नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय चुनाव लड़ने की संभावना से स्पष्ट इनकार किया है।
फिलहाल 2027 के लिए भाजपा की ओर से लालकुआं सीट पर अंतिम प्रत्याशी का निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियां, संभावित दावेदारों की सक्रियता और प्रत्याशी चयन को लेकर होने वाली प्रक्रिया पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।
डॉ. मोहन सिंह बिष्ट का संदेश फिलहाल स्पष्ट है— टिकट का फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा और उनका कहना है कि पार्टी का निर्णय जो भी होगा, वह संगठन के साथ बने रहेंगे।


