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वैश्विक तनाव के बीच पीएम मोदी की आपात बैठक: ‘सेवा तीर्थ’ में जुटेंगे सभी केंद्रीय मंत्री, ईंधन कीमतों और देश की सुरक्षा पर बड़े फैसलों के आसार

नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तेजी से गहराते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज, गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई है। यह उच्च स्तरीय बैठक आज शाम 4:00 बजे ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित होगी। बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए इसमें सभी कैबिनेट मंत्रियों, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों और राज्य मंत्रियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।

आर्थिक सुरक्षा और ईंधन की कीमतों पर होगा महामंथन

​विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस आपातकालीन बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक संकट के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोकना है। बैठक में देश की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की निरंतर बढ़ती कीमतें तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को बनाए रखने पर गहन मंथन होगा। सरकार का सर्वोच्च प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल का सीधा असर देश की आम जनता और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर न पड़े।

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विदेश दौरे से लौटते ही प्रधानमंत्री का ‘एक्शन प्लान’

​प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में पांच देशों की अपनी महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा संपन्न कर स्वदेश लौटे हैं। दिल्ली आगमन के तुरंत बाद इस तरह की वृहद बैठक बुलाए जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्रा के दौरान वैश्विक नेताओं से हुई वार्ता और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के इनपुट के आधार पर भारत की आगामी कूटनीतिक व आर्थिक रणनीति तय करेंगे।

​इसके अतिरिक्त, गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि बैठक के दौरान आगामी कैबिनेट फेरबदल, मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा और प्रशासनिक फेरबदल पर भी अनौपचारिक चर्चा हो सकती है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी अथवा सरकार की ओर से इस एजेंडे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

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मंत्रियों के दिल्ली छोड़ने पर प्रतिबंध, राजधानी में रहने के निर्देश

​मामले की गंभीरता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को तत्काल प्रभाव से दिल्ली में ही उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। किसी भी मंत्री को पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के बिना राजधानी से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। इसे सरकार की संभावित संकट प्रबंधन (क्राइसिस मैनेजमेंट) की पूर्व तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है।

इन क्षेत्रों पर रहेगा सरकार का विशेष ध्यान

​बैठक में मुख्य रूप से ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, नागरिक उड्डयन, जहाजरानी और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों (सेक्टर्स) पर रणनीतिक चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि वैश्विक संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार पहले ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समूह (हाई पावर ग्रुप) का गठन कर चुकी है, जो निरंतर हालातों की निगरानी कर रहा है।

ईंधन बचत का पहले भी दे चुके हैं संदेश:

संभावित ऊर्जा संकट के प्रति सतर्कता बरतते हुए प्रधानमंत्री मोदी पूर्व में भी आम जनमानस से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से कार्य) और ऑनलाइन शिक्षण को प्राथमिकता देने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने स्वयं के काफिले में वाहनों की संख्या को सीमित कर देश के समक्ष ईंधन संरक्षण का एक अनुकरणीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया था।

 

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​आज शाम होने वाली इस महाबैठक पर न केवल राजनीतिक विश्लेषकों की, बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। संभावना जताई जा रही है कि बैठक के समापन के पश्चात केंद्र सरकार महंगाई से राहत देने और देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए कुछ बड़े नीतिगत निर्णयों की घोषणा कर सकती है।

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