
देहरादून (विशेष संवाददाता):
पैक्स सचिव, कर्मचारी संयुक्त संगठन, उत्तराखण्ड के बैनर तले अपनी 6-सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत सहकारी समिति कर्मचारियों का प्रदर्शन 11वें दिन और अधिक उग्र हो गया। सहकारिता रजिस्ट्रार कार्यालय, मियाँवाला (देहरादून) में प्रदेश भर के 13 जनपदों से आए महिला व पुरुष कर्मचारी अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं।
चौथे चरण के आंदोलन के तहत क्रमिक अनशन का आज दूसरा दिन रहा। इस दौरान संगठन के 13 जिलों से आए प्रतिनिधि कर्मचारियों—दलजीत सिंह, गुरु प्रसाद नौटियाल, विपिन कुमार, प्रमोद चन्द्र कफलटिया, संजीव शर्मा, शेखर जोशी, दीपक डिमरी, धनीराम कुडियाल, अनूप गवाड़ी, दिनेश चौहान, मनोज खेतवाल, महेन्द्र सिंह और इन्द्रजीत सिंह ने अनुशासित रूप से भूख हड़ताल रखी और अपना विरोध जताया।
सहायक निबन्धक (AR) अल्मोड़ा के खिलाफ रोष
आंदोलनकारियों ने जिला सहायक निबन्धक (AR) अल्मोड़ा द्वारा जारी पत्र (संख्या 1749) का कड़ा विरोध करते हुए उसके विरोध में जोरदार नारेबाजी की और पुतला दहन किया। संगठन ने उक्त पत्र को गैर-संवैधानिक एवं बेबुनियाद करार दिया। संगठन के महामंत्री ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी अधिकारी या AR द्वारा इस प्रकार के अनर्गल पत्र जारी किए गए, तो उग्र प्रदर्शन, नारेबाजी और पुतला दहन किया जाएगा।
किसानों की समस्याओं के लिए सरकार ज़िम्मेदार
प्रदेश अध्यक्ष हर्षमणी नौटियाल ने कहा कि आंदोलन के 11वें दिन भी सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संवेदनहीनता और उदासीनता अत्यंत निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि इस समय रबी की फसल की बुआई का सीजन चल रहा है, लेकिन सहकारिता विभाग द्वारा 6-सूत्रीय जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय न लिए जाने के कारण पूरे प्रदेश में समितियां बंद पड़ी हैं।
समितियों के बंद रहने से किसानों को न तो खाद-उर्वरक उपलब्ध हो पा रहा है और न ही वे खाद, बीज, ऋण वितरण या मिनी बैंक से अपनी धनराशि का आहरण कर पा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किसानों को हो रही इस भारी परेशानी की सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी सहकारिता विभाग और प्रदेश सरकार की है।



