
ऑनलाइन माध्यमों से संस्कृत का वैश्विक प्रचार-प्रसार कर रहे अमित ओली ने पीएचडी प्राप्त कर बढ़ाया चम्पावत का गौरव
गोसनी (ओलीगांव) निवासी अमित ओली ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से संस्कृत विषय में विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त की; पुस्तक लेखन और डिजिटल माध्यमों से भी कर रहे हैं संस्कृत का प्रचार-प्रसार।
लोहाघाट। चम्पावत जनपद के खेतीखान क्षेत्र के ग्राम गोसनी (ओलीगांव) निवासी अमित ओली ने उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर जनपद का गौरव बढ़ाया है। संस्कृत भाषा के प्रति विशेष लगाव रखने वाले अमित ओली अकादमिक, साहित्यिक एवं डिजिटल क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। वे आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर संस्कृत भाषा को देश-विदेश के लोगों तक पहुँचाने तथा नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
अमित ओली ने जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से संस्कृत विषय में विद्या वाचस्पति (पीएचडी) की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने अपना शोधकार्य ‘संस्कृत महाकाव्यों में भौगोलिक एवं पारिस्थितिकीय अध्ययन (कुमारसम्भव महाकाव्य के विशेष संदर्भ में)’ विषय पर पूर्ण किया।
उनके शोध का निर्देशन प्रो. मनीष खेमरिया, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय उत्कृष्ट महाविद्यालय, ग्वालियर द्वारा किया गया।
शोध में महाकवि कालिदास रचित कुमारसम्भव महाकाव्य के विभिन्न सर्गों में वर्णित भौगोलिक एवं पारिस्थितिकीय तत्वों का गहन अध्ययन किया गया है। इसमें हिमालय के प्राकृतिक स्वरूप, पर्वतों, नदियों, वनस्पतियों, जलवायु, ऋतु परिवर्तन तथा मानव और प्रकृति के पारस्परिक संबंधों का साहित्यिक एवं शोधपरक विश्लेषण किया गया है।
अमित ओली का योगदान केवल शोध एवं अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। वे संस्कृत विषय के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग के उद्देश्य से पुस्तक लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘रसास्वाद प्रतियोगिता कल्पद्रुम्’, ‘प्रारम्भिक ज्योतिष ज्ञान’ तथा ‘संस्कृतसुमेधा’ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त उनकी आगामी पुस्तक ‘कर्मकाण्ड मार्तण्ड’ भी शीघ्र प्रकाशित होने जा रही है। इन पुस्तकों के माध्यम से वे संस्कृत के विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं एवं अध्ययनकर्ताओं को उपयोगी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही संस्कृत साहित्य, ज्योतिष एवं पारंपरिक ज्ञान के प्रसार में योगदान दे रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, अमित ओली सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्मों के माध्यम से संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से देश-विदेश के लाखों लोग जुड़े हुए हैं। वे डिजिटल माध्यमों से संस्कृत भाषा, साहित्य एवं ज्ञान से संबंधित सामग्री साझा कर लोगों को संस्कृत के अध्ययन के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। उनका यह प्रयास संस्कृत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहुँच बढ़ाने में सहायक बन रहा है।
संस्कृत के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक, पुस्तक लेखन और शोध के साथ जोड़ने का उनका प्रयास सराहनीय है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम, लगन एवं समर्पण का परिणाम है, बल्कि चम्पावत जनपद के लिए भी गौरव का विषय है।
उनकी इस उपलब्धि से खेतीखान क्षेत्र सहित पूरे चम्पावत जनपद में हर्ष का माहौल है। क्षेत्रवासियों एवं शिक्षाविदों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।



